ब्रिक्स बैठक से पहले भारत की दो-टूक: ऊर्जा सुरक्षा और राष्ट्रीय हित सर्वोपरि
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नई दिल्ली: 14 और 15 मई को दिल्ली में होने जा रही ब्रिक्स (BRICS) विदेश मंत्रियों की बैठक से पहले भारत ने कूटनीतिक मोर्चे पर अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है। विदेश मंत्रालय ने साफ कर दिया है कि देश की ऊर्जा नीति से लेकर पड़ोसी देशों के साथ संबंधों तक, भारत का रुख पूरी तरह से अपने राष्ट्रीय हितों पर केंद्रित है।

ऊर्जा नीति: भारत की प्राथमिकता 1.4 अरब लोग

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने ऊर्जा जरूरतों पर जोर देते हुए कहा कि भारत के लिए राष्ट्रीय हित सबसे ऊपर है। 1.4 अरब की आबादी वाले देश की ऊर्जा मांगों को पूरा करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि तेल और गैस जैसे संसाधनों के लिए भारत वैश्विक बाजार और परिस्थितियों के अनुसार फैसले लेने के लिए स्वतंत्र है और भविष्य में भी यही नीति जारी रहेगी।

ब्रिक्स का विस्तार: आम सहमति ही आधार

ब्रिक्स की सदस्यता के विस्तार को लेकर उठ रहे सवालों पर जायसवाल ने स्पष्ट किया कि कोई भी नया देश समूह का हिस्सा बनेगा या नहीं, यह फैसला सभी सदस्य देशों की आपसी सहमति से ही लिया जाएगा। उन्होंने याद दिलाया कि हाल के वर्षों में जोहान्सबर्ग और कजान बैठकों के जरिए समूह का विस्तार हुआ है और आगे का विस्तार भी इसी प्रक्रिया के तहत होगा।

दिल्ली में महाबैठक: क्या है एजेंडा?

दिल्ली में आयोजित होने वाली इस उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर करेंगे। इसमें सदस्य देशों के अलावा सहयोगी देशों के प्रतिनिधि भी शामिल होंगे। बैठक का मुख्य विषय BRICS at 20: Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability रखा गया है। इस दौरान आर्थिक सहयोग, नवाचार, वैश्विक शासन में सुधार और बहुपक्षीय साझेदारी जैसे गंभीर मुद्दों पर मंथन होगा।

पड़ोसी देशों के साथ संबंधों पर भारत का रुख

बांग्लादेश और नेपाल के साथ भारत के रिश्तों पर भी विदेश मंत्रालय ने स्पष्टीकरण दिया। प्रवक्ता ने कहा कि बांग्लादेश के साथ संबंधों को सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ाया जा रहा है। वहीं, नेपाल के साथ संबंधों को गहरा और बहुआयामी बताते हुए उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच संवाद का सिलसिला जारी है। नेपाल से मिले आमंत्रण के बाद विदेश मंत्री के दौरे की तारीखें आपसी सहमति से जल्द तय की जाएंगी।

जानकारों का मानना है कि दिल्ली में होने वाली यह बैठक भारत की वैश्विक कूटनीति के लिए एक बड़ा अवसर है, जहां भारत दुनिया के सामने अपनी प्राथमिकताओं और भविष्य की रणनीति को मजबूती से पेश करेगा।

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