10 रुपये का डायपर लीक नहीं होता, पर पेपर लीक हो जाता है : NEET विवाद पर खान सर का तीखा हमला
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NEET-UG परीक्षा एक बार फिर विवादों के घेरे में है। पेपर लीक के आरोपों ने लाखों छात्रों और उनके अभिभावकों के सपनों पर पानी फेर दिया है। इस गंभीर मुद्दे पर मशहूर शिक्षक खान सर ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए शिक्षा प्रणाली और जांच एजेंसियों पर तीखे सवाल उठाए हैं।

सिस्टम की विफलता पर तंज खान सर ने व्यवस्था पर कटाक्ष करते हुए कहा, 10 रुपये में मिलने वाला बच्चों का डायपर लीक नहीं होता, लेकिन इनका पेपर लीक हो जाता है। उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम को छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करार दिया। उन्होंने व्यंग्यात्मक लहजे में नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) का नया नामकरण करते हुए कहा कि इसे नेवर ट्रस्टेबल एजेंसी कहा जाना चाहिए।

एजेंसियों की कार्यक्षमता पर सवाल खान सर ने इस बात पर हैरानी जताई कि पेपर लीक की जानकारी जांच एजेंसियों को नहीं, बल्कि छात्रों को सबसे पहले मिली। उन्होंने सवाल पूछा कि जिस एजेंसी को परीक्षा की सुरक्षा की जिम्मेदारी सौंपी गई है, उसे लीक का पता क्यों नहीं चलता? क्या उन्हें परीक्षा कराने के लिए रखा गया है या पेपर लीक कराने के लिए?

जांच की धीमी रफ्तार और भविष्य का डर सीबीआई जांच पर भी खान सर ने संदेह जताया। उनका कहना है कि अगर मामला सिर्फ सीबीआई के पास गया, तो जांच पूरी होने तक छात्रों की मेडिकल की पढ़ाई का समय निकल जाएगा। उन्होंने मांग की कि इस पूरे मामले की निगरानी सुप्रीम कोर्ट के किसी रिटायर्ड जज की देखरेख में होनी चाहिए, ताकि दोषियों को जल्द से जल्द सजा मिल सके।

दोषियों पर सख्त कार्रवाई की दरकार खान सर के अनुसार, 2024 में भी पेपर लीक का मामला सामने आया था, लेकिन ठोस कार्रवाई न होने के कारण दोषियों का मनोबल बढ़ गया है। उन्होंने कहा कि सजा में देरी का खामियाजा केवल उन छात्रों को भुगतना पड़ता है, जिन्होंने सालों तक ईमानदारी से मेहनत की है।

प्रधानमंत्री और सुप्रीम कोर्ट से हस्तक्षेप की मांग इस मुद्दे को राष्ट्रीय छवि से जोड़ते हुए उन्होंने प्रधानमंत्री और सुप्रीम कोर्ट से सीधे हस्तक्षेप की अपील की है। खान सर ने चेतावनी दी कि यदि समय रहते कड़ी कार्रवाई नहीं की गई, तो देश की पूरी शिक्षा व्यवस्था से छात्रों का भरोसा पूरी तरह उठ जाएगा।

छात्रों पर पड़ता है दोहरा दबाव खान सर ने एक और महत्वपूर्ण मुद्दा उठाया कि पेपर लीक के बाद अक्सर एजेंसियां अगली परीक्षा को बदला लेने के अंदाज में बेहद कठिन बना देती हैं। इससे वे छात्र भी पिस जाते हैं, जिनका लीक कांड से कोई लेना-देना नहीं होता। उन्होंने कहा कि यह सिलसिला अब रुकना चाहिए, ताकि मेहनती छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ न हो।

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