फिर युद्ध के मु्हाने पर दुनिया: ट्रंप ने ईरान के शांति प्रस्ताव को बताया कूड़ा , ठप पड़ी बातचीत
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वॉशिंगटन/तेहरान: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव एक बार फिर वैश्विक शांति के लिए खतरा बन गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान द्वारा भेजे गए शांति प्रस्ताव को सिरे से खारिज करते हुए उसे कचरा (Garbage) करार दिया है। ट्रंप का कहना है कि दोनों देशों के बीच युद्धविराम अब वेंटिलेटर यानी लाइफ सपोर्ट पर है।

शांति प्रस्ताव पर तनातनी ट्रंप ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि उन्होंने ईरान के प्रस्ताव को पूरा पढ़ना भी जरूरी नहीं समझा। इसके विपरीत, ईरान ने अपने 14-सूत्रीय प्रस्ताव में कठोर शर्तें रखी हैं। तेहरान ने लेबनान में संघर्ष रोकने, होर्मुज स्ट्रेट पर अपनी संप्रभुता को मान्यता देने, युद्ध के नुकसान का मुआवजा और अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी हटाने की मांग की है। वहीं, अमेरिका पहले स्थायी युद्धविराम और फिर परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत चाहता था।

तेल बाजार में मची खलबली तनाव के गहराते ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया है। ब्रेंट क्रूड 104.50 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर गया है। दुनिया की 20 प्रतिशत ऊर्जा आपूर्ति होर्मुज स्ट्रेट से गुजरती है, जो अब लगभग ठप हो चुकी है। सुरक्षा कारणों से तेल टैंकरों ने अपने ट्रैकिंग सिस्टम तक बंद कर दिए हैं, जिससे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर गंभीर संकट मंडरा रहा है।

अमेरिका का कड़ा रुख और चीन कनेक्शन अमेरिका ने ईरान के तेल को चीन भेजने में मदद करने वाली कंपनियों पर नए प्रतिबंध लगा दिए हैं। वॉशिंगटन का उद्देश्य ईरान के सैन्य और परमाणु कार्यक्रमों की फंडिंग को रोकना है। महत्वपूर्ण बात यह है कि राष्ट्रपति ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की प्रस्तावित मुलाकात में ईरान संकट एजेंडे का सबसे अहम हिस्सा हो सकता है।

घरेलू दबाव और अंतरराष्ट्रीय अलगाव ट्रंप प्रशासन को केवल ईरान ही नहीं, बल्कि अपने ही देश और सहयोगियों के दबाव का भी सामना करना पड़ रहा है। एक सर्वे के मुताबिक, दो-तिहाई अमेरिकी नागरिक युद्ध के औचित्य पर सवाल उठा रहे हैं। बढ़ती ईंधन कीमतों से जनता में भारी नाराजगी है, जिससे निपटने के लिए ट्रंप फेडरल टैक्स में कटौती पर विचार कर रहे हैं।

वहीं, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका को अपेक्षित समर्थन नहीं मिल रहा है। नाटो (NATO) देशों ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक शांति समझौता नहीं होता, वे होर्मुज स्ट्रेट में किसी नौसैनिक सैन्य मिशन का हिस्सा नहीं बनेंगे। अब सबकी निगाहें कतर में होने वाली वार्ता पर टिकी हैं, जहां समुद्री सुरक्षा और शांति बहाली पर चर्चा की जाएगी।

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