NEET-UG विवाद: क्या धर्मेंद्र प्रधान की जाति पर छिड़ी बहस वाकई शिक्षा व्यवस्था की खामियों से ध्यान भटकाने की साजिश है?
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NEET-UG 2026 परीक्षा में पेपर लीक और धांधली के आरोपों के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान विपक्ष के निशाने पर हैं। परीक्षा रद्द होने और जांच CBI को सौंपे जाने के बाद से कांग्रेस लगातार उन पर हमलावर है। इस बीच, सोशल मीडिया पर मंत्री की जाति को लेकर जिज्ञासा और बहस भी तेज हो गई है।

जाति पर चर्चा और धर्मेंद्र प्रधान की पृष्ठभूमि धर्मेंद्र प्रधान ओडिशा की राजनीति से निकलकर दिल्ली की सत्ता के केंद्र तक पहुंचे हैं। वह कुर्मी जाति से ताल्लुक रखते हैं और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) का प्रतिनिधित्व करते हैं। अक्सर उनकी जाति को लेकर सवाल उठाए जाते रहे हैं, जिस पर खुद धर्मेंद्र प्रधान संसद में भी स्थिति स्पष्ट कर चुके हैं।

राजनीतिक विरासत और सफर 26 जून 1969 को ओडिशा के तलचर में जन्मे धर्मेंद्र प्रधान को राजनीति विरासत में मिली थी। उनके पिता, देबेंद्र प्रधान, अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में केंद्रीय मंत्री रह चुके थे। धर्मेंद्र प्रधान ने उत्कल विश्वविद्यालय से मानवशास्त्र (Anthropology) में पोस्ट ग्रेजुएशन किया है। कॉलेज जीवन में ABVP से जुड़ने के बाद उन्होंने अपना राजनीतिक सफर शुरू किया था।

ओडिशा से दिल्ली तक का दबदबा साल 2000 में पहली बार विधायक बनने वाले धर्मेंद्र प्रधान ने 2004 में लोकसभा का सफर तय किया। बीजेपी संगठन में गहरी पकड़ और प्रधानमंत्री मोदी का करीबी होने के कारण वे मोदी सरकार में पेट्रोलियम जैसे अहम मंत्रालयों की कमान संभाल चुके हैं। पार्टी के रणनीतिकार के रूप में ओडिशा में भाजपा को मजबूत करने का श्रेय भी उन्हें दिया जाता है।

विपक्ष क्यों है हमलावर? शिक्षा मंत्री के रूप में प्रधान ने नई शिक्षा नीति (NEP) और डिजिटल एजुकेशन पर काफी जोर दिया है। हालांकि, वर्तमान में NEET-UG परीक्षा में हुई धांधली और NTA की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवालों ने उनकी साख को चुनौती दी है। विपक्ष का आरोप है कि परीक्षा व्यवस्था विफल रही है, जिसके कारण लाखों छात्रों का भविष्य अधर में है।

क्या जाति का मुद्दा है ध्यान भटकाने की चाल? विशेषज्ञों का मानना है कि परीक्षा लीक जैसे गंभीर मुद्दे पर चर्चा के बजाय मंत्री की जाति पर बहस छेड़ना सियासी एजेंडे का हिस्सा हो सकता है। विपक्ष जहां परीक्षा में हुई धांधली के लिए मंत्री की जवाबदेही तय करने की मांग कर रहा है, वहीं शिक्षा मंत्रालय फिलहाल इस पूरे मामले पर बेहद सतर्क है और CBI जांच रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है।

धर्मेंद्र प्रधान फिलहाल अपनी तेजतर्रार शैली और रणनीतिक कौशल के लिए जाने जाते हैं, लेकिन NEET-UG विवाद उनके अब तक के राजनीतिक करियर की सबसे बड़ी अग्निपरीक्षा साबित हो सकता है।

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