लखनऊ: छावनी परिषद (कंटोनमेंट बोर्ड) लखनऊ में एक कर्मचारी का डिमोशन चर्चा का विषय बन गया है। सफाई सुपरवाइजर के पद पर तैनात उमेश कुमार को रातों-रात सफाईकर्मी के पद पर वापस भेज दिया गया। आरोप है कि यह कार्रवाई उनकी बेटी द्वारा सपा मुखिया अखिलेश यादव को भंडारे का प्रसाद खिलाने के कारण की गई है।
क्या है पूरा मामला? 14 अप्रैल को अंबेडकर जयंती के अवसर पर छावनी परिषद गेट के पास एक भंडारे का आयोजन किया गया था। संयोग से उसी दिन बैसाखी के उपलक्ष्य में सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव सदर गुरुद्वारा पहुंचे थे। गुरुद्वारे से लौटते समय उमेश कुमार की बेटी अंजलि मैसी ने उनसे प्रसाद ग्रहण करने का आग्रह किया। अखिलेश यादव ने गाड़ी से उतरकर प्रसाद (सब्जी-पूरी) खाया, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।
दो दिन बाद ही गिरी गाज वीडियो वायरल होने के महज दो दिन बाद, 16 अप्रैल को छावनी परिषद प्रशासन ने उमेश कुमार के खिलाफ आदेश जारी कर दिया। उन्हें सुपरवाइजर के काम से हटाकर सीधे सफाईकर्मी बना दिया गया। उमेश कुमार का कहना है कि उन्होंने पिछले साल अक्टूबर से ही सुपरवाइजर के तौर पर सुरक्षा गार्डों की ड्यूटी और अन्य प्रशासनिक जिम्मेदारियां संभाली थीं, लेकिन इस घटना के बाद उन्हें उनके मूल पद पर वापस भेज दिया गया।
प्रशासन का तर्क: नियमों का उल्लंघन इस मामले पर मुख्य अधिशासी अधिकारी (CEO) अभिषेक राठौर ने सफाई दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कार्रवाई का आधार अखिलेश यादव को प्रसाद खिलाना नहीं, बल्कि अनुशासनहीनता है। उन्होंने कहा कि उमेश कुमार ने भंडारे के आयोजन के लिए सेना के उच्च अधिकारियों और रक्षा मंत्रालय के अफसरों को सीधे पत्र लिखकर आमंत्रित किया था। बिना सक्षम अधिकारी की अनुमति के इस तरह प्रोटोकॉल का पालन न करना सेवा आचरण नियमावली के विरुद्ध है।
सियासी बयानबाजी तेज इस पूरी कार्रवाई ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है। सोशल मीडिया पर इस मामले को लेकर प्रशासन की आलोचना हो रही है। विपक्षी नेताओं का आरोप है कि राजनीतिक मतभेदों का बदला एक कर्मचारी के परिवार से लिया जा रहा है। वहीं, कर्मचारी का परिवार इसे अपनी बेटी द्वारा की गई अतिथि सेवा का दंड बता रहा है। फिलहाल, यह मामला प्रशासनिक गलियारों और सोशल मीडिया पर बहस का मुद्दा बना हुआ है।
*दलित नफ़रती सरकार के दिवालियापन तो देखिय,
— Aditi Yadav (@aditiyadav_00) May 6, 2026
राजनीति में विचारों का ना मिलने का मतलब जनता को परेशान करना तो नहीं है और न ही जनता से बदला लेना,
अंजली मैसी (जाटव) के पिता उमेश कुमार जी को सिर्फ इसीलिए डिमोशन देकर सफाईकर्मी बना दिया, क्योंकि उन्होंने अखिलेश यादव ने इनके यहां भंडारे… pic.twitter.com/2OSEgMLhH5
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