ग्रेट निकोबार परियोजना को लेकर मोदी सरकार और मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के बीच टकराव तेज हो गया है। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि राहुल गांधी की हालिया यात्रा से घबराई सरकार अब बचाव की मुद्रा में आ गई है।
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने दावा किया कि 28 अप्रैल, 2026 को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की निकोबार यात्रा के बाद सरकार ने आनन-फानन में एक प्रेस नोट जारी किया। रमेश के अनुसार, यह नोट विशेषज्ञों और स्थानीय समुदायों द्वारा उठाए गए गंभीर सवालों का जवाब देने में विफल रहा है।
राहुल गांधी ने पिछले सप्ताह अपनी यात्रा के दौरान कैंपबेल बे की इस परियोजना को देश की प्राकृतिक और जनजातीय विरासत के खिलाफ सबसे बड़ा घोटाला करार दिया था। उन्होंने आरोप लगाया कि यह परियोजना पर्यावरण और वहां की मूल निवासी जनजातियों के अस्तित्व को खतरे में डाल रही है।
कांग्रेस का तर्क है कि सरकार द्वारा यह कहना कि परियोजना केवल 1.82 प्रतिशत भूमि का उपयोग कर रही है, पूरी तरह से भ्रामक है। पार्टी का कहना है कि यह आंकड़ा उस अद्वितीय पारिस्थितिकी तंत्र की जैविक समृद्धि को पूरी तरह नजरअंदाज करता है, जो विश्व स्तर पर महत्वपूर्ण है।
जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि वन्यजीव संस्थान (WII) और प्राणी सर्वेक्षण (ZSI) जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों पर परियोजना को मंजूरी देने के लिए दबाव बनाया गया। उन्होंने कहा कि इन्हीं संस्थानों को अब निगरानी का काम देकर हितों का स्पष्ट टकराव पैदा किया गया है। साथ ही, सरकार पर आलोचना करने वाले स्वतंत्र विशेषज्ञों को काली सूची में डालने का भी आरोप लगाया गया है।
कांग्रेस ने जोर देकर कहा कि निकोबारी जनजातीय समुदाय के अधिकारों की अनदेखी की जा रही है। इसके अलावा, एनजीटी द्वारा गठित उच्चाधिकार प्राप्त समिति (HPC) की निष्पक्षता पर भी सवाल उठाए गए हैं। रमेश का कहना है कि इस समिति में वही लोग शामिल हैं जो खुद परियोजना से जुड़े हैं, जो प्रक्रिया को संदेह के घेरे में लाता है।
वहीं, सरकार ने अपने रुख को स्पष्ट करते हुए कहा है कि यह परियोजना अंडमान सागर में भारत की रणनीतिक स्थिति को मजबूत करने के लिए बेहद जरूरी है। सरकार का दावा है कि विकास और पर्यावरणीय सुरक्षा के बीच संतुलन बनाया गया है और स्थानीय समुदायों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी गई है।
कांग्रेस ने मांग की है कि इन सभी चिंताओं को संसदीय मंच पर रखा जाए और इस परियोजना पर पारदर्शी तरीके से चर्चा होनी चाहिए।
The Modi government, clearly in damage control mode after the hugely impactful visit of the LoP Shri @RahulGandhi to Great Nicobar on April 28, 2026, issued a press note on the Great Nicobar Island Development Project three days later.
— Congress (@INCIndia) May 3, 2026
Yet, its press note issued three days later… pic.twitter.com/cUkM04i9Hn
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