सोलर सुपर पावर बना भारत: फ्रांस की दोस्ती और दक्षिण कोरिया के साथ से बदली दुनिया की ऊर्जा तस्वीर
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भारत के पास साल के आठ महीने भरपूर सूरज की रोशनी रहती है। इसी ऊर्जा का लाभ उठाने के लिए भारत ने सोलर पैनलों का रुख किया, लेकिन राह आसान नहीं थी। एक दौर ऐसा था जब अमेरिका के दबाव और विश्व व्यापार संगठन (WTO) के नियमों के कारण भारत अपनी घरेलू सोलर मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्री खड़ी करने में नाकाम रहा। वहीं, सस्ते चीनी सोलर पैनलों के दबदबे ने भारत के लिए चुनौती और बढ़ा दी।

इस मुश्किल समय में भारत को फ्रांस का साथ मिला। 2015 में पेरिस जलवायु समझौते के दौरान भारत और फ्रांस ने इंटरनेशनल सोलर अलायंस (ISA) का ऐलान कर दुनिया को चौंका दिया। यह गठबंधन सिर्फ एक पहल नहीं, बल्कि भारत के ग्लोबल लीडर बनने की नीव थी। आज इसी कड़ी में दक्षिण कोरिया भी अब ISA का हिस्सा बन गया है, जो भारत के बढ़ते वैश्विक प्रभाव का प्रमाण है।

गुरुग्राम से दुनिया तक: ISA का नया सफर

इंटरनेशनल सोलर अलायंस की शुरुआत 121 उन देशों को जोड़कर की गई थी, जहां सूरज की रोशनी प्रचुर मात्रा में है। 2018 में इस दायरे को बढ़ाकर संयुक्त राष्ट्र के सभी सदस्य देशों के लिए खोल दिया गया। मजे की बात यह है कि ISA भारत का पहला ऐसा अंतरराष्ट्रीय संगठन है जिसका मुख्यालय गुरुग्राम (हरियाणा) में स्थित है। आज इसके 125 सदस्य देश स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में एकजुट हैं।

1 ट्रिलियन डॉलर का निवेश और अफ्रीका पर फोकस

ISA का लक्ष्य 2030 तक 1,000 गीगावाट सौर ऊर्जा क्षमता को हासिल करना है। इसके लिए 1 ट्रिलियन डॉलर (करीब 83 लाख करोड़ रुपये) के निवेश का लक्ष्य रखा गया है। इसमें सरकार के साथ-साथ प्राइवेट फंडिंग को भी जोड़ा गया है। खास बात यह है कि भारत घाना, केन्या, रवांडा और युगांडा जैसे अफ्रीकी देशों में सोलर रूफटॉप प्रोजेक्ट्स के जरिए साउथ-साउथ कोऑपरेशन का मॉडल पेश कर रहा है।

चीन से मुकाबला और भारत की चुनौतियां

चीन आज भी सोलर पैनल प्रोडक्शन के मामले में सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है। भारी सब्सिडी के कारण चीन के पैनल वैश्विक बाजार में सस्ते हैं। भारत ने 2018 में 25 फीसदी इंपोर्ट ड्यूटी लगाई थी, लेकिन बाजार में अब भी चीन का दबदबा है। इसके अलावा, भारत के सामने ISA के लक्ष्यों को समय पर पूरा करने और अपनी सॉफ्ट पावर के जरिए वैश्विक समीकरण साधने की बड़ी जिम्मेदारी है।

वर्ल्ड अर्थ डे 2026: एक नया संकल्प

इस वर्ष के वर्ल्ड अर्थ डे 2026 की थीम Our Power, Our Planet रखी गई है। इसका मुख्य उद्देश्य व्यक्तिगत और सरकारी स्तर पर अक्षय ऊर्जा की ओर बढ़ना है। 2026 तक का एजेंडा स्पष्ट है—जलवायु परिवर्तन से लड़ने के लिए सोलर और विंड एनर्जी के इस्तेमाल को तीन गुना बढ़ाना। भारत अब केवल एक उपभोक्ता नहीं, बल्कि सौर ऊर्जा का वैश्विक नेतृत्वकर्ता बनकर उभर रहा है।

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