गुवाहाटी में जलप्रलय : 8 घंटे की मूसलाधार बारिश ने थामी शहर की रफ्तार, एक महिला की मौत
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असम का सबसे बड़ा शहर गुवाहाटी इस वक्त कुदरत के कहर का सामना कर रहा है। देश के अन्य हिस्सों में जहाँ लोग भीषण गर्मी और लू से बेहाल हैं, वहीं गुवाहाटी में हुई महज 7-8 घंटे की मूसलाधार बारिश ने शहर को जलमग्न कर दिया है। हालात इतने गंभीर हैं कि जनजीवन पूरी तरह से अस्त-व्यस्त हो गया है।

प्रमुख इलाकों में घुटनों तक पानी भारी बारिश का असर चांदमारी, नवीन नगर, रुक्मिणी नगर, जू रोड, गणेशगुड़ी, हाथीगांव और बेलटोला सर्वे जैसे प्रमुख इलाकों में साफ देखा जा सकता है। सड़कें नदियों में तब्दील हो गई हैं, जिससे वाहनों का चलना मुश्किल हो गया है। कई जगहों पर सुबह तक पानी जमा रहा, जिससे दफ्तर और जरूरी काम पर जाने वाले लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।

स्कूल-कॉलेज बंद, प्रशासन अलर्ट हालात को देखते हुए प्रशासन ने शहर के सभी शैक्षणिक संस्थानों (सरकारी और निजी) को बंद रखने का आदेश दिया है। सड़कों पर जलभराव के चलते ट्रैफिक व्यवस्था चरमरा गई है। कई वाहन बीच रास्ते में ही फंस गए, जिससे लंबा जाम लग गया। निचले इलाकों में रहने वाले लोग अपने घरों में कैद होने को मजबूर हैं।

खुले मैनहोल ने ली जान बारिश और बाढ़ के बीच एक दुखद घटना सामने आई है। मालिगांव इलाके में एक महिला की मौत हो गई। बताया जा रहा है कि बारिश के दौरान जलमग्न सड़क पर चलते समय वह खुले मैनहोल में गिर गई, जिसके बाद उसका शव करीब 150 मीटर दूर बरामद हुआ। इस घटना ने शहर के ड्रेनेज सिस्टम और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश शहर की जल निकासी व्यवस्था पर लोगों का गुस्सा फूट पड़ा है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि हर साल मानसून की पहली बारिश ही शहर की पोल खोल देती है। कचरे के गलत निपटान और प्लास्टिक के कारण नालियां जाम हो रही हैं, जिससे मामूली बारिश भी बाढ़ का रूप ले लेती है। आम जनता महंगे परिवहन साधनों (कैब-रिक्शा) पर अतिरिक्त पैसे खर्च करने को मजबूर है।

अगले 24 घंटे और भी अहम मौसम विभाग ने राहत के कोई संकेत नहीं दिए हैं। गुवाहाटी के लिए अगले 24 घंटे बेहद नाजुक हैं। शहर के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है और 26 अप्रैल तक रुक-रुक कर बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है। तापमान 22 से 32 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने का अनुमान है। प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है, लेकिन फिलहाल जलभराव से जल्द राहत मिलने के आसार कम ही हैं।

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