करेरा क्या तुम्हारे डैडी का है? : MP में 5 लोगों को थार से कुचलने वाले बेटे का बचाव करते हुए विधायक ने पुलिस को दी खुली धमकी
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मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले में एक सड़क हादसा अब सत्ता और कानून के बीच सीधी जंग में बदल गया है। बीजेपी विधायक प्रीतम लोधी के बेटे दिनेश लोधी पर पांच लोगों को थार से कुचलने का आरोप है। अब इस मामले ने तब तूल पकड़ लिया जब विधायक ने पुलिस अधिकारी को खुलेआम चुनौती देते हुए बेहद आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया।

जनता सर्वोपरि का दावा और वास्तविकता

घटना के तुरंत बाद, विधायक प्रीतम लोधी ने सोशल मीडिया पर खुद को जनता के प्रति समर्पित दिखाने की कोशिश की थी। उन्होंने लिखा था कि एक जनप्रतिनिधि के लिए परिवार से ऊपर जनता होती है और दोषियों पर कार्रवाई होनी चाहिए। लेकिन कुछ ही दिनों में उनके तेवर पूरी तरह बदल गए और उन्होंने कानून का पालन कराने वाले पुलिस अधिकारियों को ही निशाने पर ले लिया।

IPS अधिकारी को विधायक की सरेआम धमकी

विधायक प्रीतम लोधी ने करेरा के एसडीओपी (SDOP) आयुष जाखर को सीधे धमकी देते हुए कहा, एसडीओपी साहेब, क्या करेरा तुम्हारे डैडी का है? मेरा बेटा करेरा भी आएगा और चुनाव भी लड़ेगा। तेरे डैडी में दम हो तो रोक लेना। उन्होंने अधिकारी को औकात में रहने की चेतावनी देते हुए कहा कि अगर पुलिस ने गलत दबाव बनाया या जांच में पक्षपात किया, तो वे इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे।

बिना नंबर की थार और वीआईपी रौब

आरोप है कि 16 अप्रैल की सुबह दिनेश लोधी अपनी तेज रफ्तार काली थार से वहां से गुजर रहा था। बिना नंबर प्लेट, काली फिल्म और हूटर लगी इस गाड़ी ने दो पैदल महिलाओं और बाइक सवार तीन युवकों को रौंद दिया। हैरानी की बात यह है कि पूछताछ के लिए दिनेश लोधी जब थाने पहुंचा, तो वह उसी गैर-कानूनी थार में सवार होकर आया। उसका तर्क था कि हॉर्न और सायरन बजाने के बावजूद लोग नहीं हटे, इसलिए गाड़ी आगे बढ़ा दी।

घायलों का दर्द और आरोपी का इतिहास

घटना में घायल हुए पीड़ितों का आरोप है कि हादसे के बाद न तो विधायक और न ही उनके बेटे ने कोई सुध ली। वहीं, आरोपी दिनेश लोधी का आपराधिक रिकॉर्ड भी लंबा है। उस पर 2023 में धमकी देने, 2024 में ग्वालियर में पड़ोसियों पर गाड़ी चढ़ाने की कोशिश और वसूली जैसे गंभीर आरोप हैं। विधायक प्रीतम लोधी का खुद का इतिहास रहा है, वे पहले भी दंगा, मारपीट और हत्या के प्रयास जैसे मामलों में आरोपी रह चुके हैं।

कानून बनाम सियासी दबदबा

फिलहाल, पुलिस ने मोटर व्हीकल एक्ट के तहत मामूली जुर्माना लगाकर मामला शांत करने की कोशिश की है, लेकिन विधायक की इस आक्रामक धमकी ने पूरे प्रशासन को कठघरे में खड़ा कर दिया है। सवाल यह उठ रहा है कि क्या सत्ताधारी दल के रसूख के आगे कानून का डर केवल आम आदमी के लिए ही बचा है, जबकि आरोपी खुलेआम पुलिस को चुनौती दे रहे हैं?

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