NDA में रार: शराबबंदी पर सम्राट चौधरी की दो टूक तो मांझी ने दिखाया आईना
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बिहार एनडीए में शराबबंदी कानून को लेकर घमासान तेज हो गया है। एक तरफ मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इस कानून को जारी रखने का पक्का इरादा जता दिया है, तो दूसरी तरफ केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने समीक्षा की वकालत कर सरकार के सामने नई चुनौती पेश कर दी है।

मुख्यमंत्री का रुख: बदलाव का सवाल ही नहीं बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने स्पष्ट कर दिया है कि राज्य में शराबबंदी कानून लागू रहेगा। उन्होंने साफ शब्दों में कहा है कि इस नीति को खत्म करने या इसमें कोई बदलाव करने का कोई विचार नहीं है। सरकार अपने पुराने स्टैंड पर पूरी तरह कायम है।

मांझी का तंज: अभी तो शुरुआत है सीएम के इस बयान के बाद केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी की प्रतिक्रिया काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। पटना में पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा, सम्राट जी को मुख्यमंत्री बने अभी कुछ ही दिन हुए हैं। वे और उनके सहयोगी आपस में बैठकर इस पर विचार करेंगे, लाभ-हानि का आकलन करेंगे और फिर कोई ठोस निर्णय लेंगे।

क्यों उठ रही है समीक्षा की मांग? जीतन राम मांझी ने शराबबंदी को सैद्धांतिक रूप से अच्छी नीति तो बताया, लेकिन इसके क्रियान्वयन (Implementation) पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि नीति गलत नहीं है, लेकिन इसे लागू करने के तरीके में बड़ी खामियां हैं, जिसका खामियाजा सबसे ज्यादा गरीब तबके को भुगतना पड़ रहा है।

गरीबों की जान पर बन आई है बात मांझी ने एक गंभीर मुद्दा उठाते हुए कहा कि शराबबंदी के बाद लोग जल्दीबाजी में जहरीली शराब बना रहे हैं। इसमें यूरिया और अन्य हानिकारक चीजें मिलाई जा रही हैं, जिससे गरीब लोग 50-60 साल की उम्र में ही मौत का शिकार हो रहे हैं। उनके अनुसार, शराबबंदी का गलत क्रियान्वयन गरीबों को दोहरा नुकसान पहुंचा रहा है।

वित्तीय नुकसान और व्यवस्था में सुधार पूर्व मुख्यमंत्री ने यह भी संकेत दिया कि यदि शराब नीति की समीक्षा की जाए और इसके क्रियान्वयन को दुरुस्त किया जाए, तो राज्य के राजस्व (वित्तीय कोष) को भी फायदा हो सकता है। मांझी की यह मांग जेडीयू विधायक अनंत सिंह और उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी के नेताओं के सुर में सुर मिलाती दिख रही है, जिससे बिहार एनडीए में आने वाले दिनों में बहस और गहरा सकती है।

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