महाराष्ट्र की राजनीति में जुबानी जंग एक बार फिर तेज हो गई है। कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण अब अपनी ही पुरानी पार्टी के निशाने पर हैं। विवाद की शुरुआत चव्हाण के उस बयान से हुई, जिसमें उन्होंने विपक्ष पर राजनीतिक अहंकार के चलते महिला आरक्षण को रोकने का आरोप लगाया था।
कांग्रेस ने याद दिलाई पारिवारिक विरासत महाराष्ट्र कांग्रेस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक कड़ा हमला बोलते हुए अशोक चव्हाण को उनके पिता स्व. शंकरराव चव्हाण की निष्ठा की याद दिलाई। कांग्रेस ने कहा, जिस कांग्रेस पार्टी के साथ आपके पिता जीवनभर वफादार रहे, उसी पार्टी के साथ आपने गद्दारी की है। कांग्रेस ने चव्हाण को उनके पारिवारिक मूल्यों और विचारधारा से विश्वासघात करने वाला बताया।
तथ्यों के साथ कांग्रेस का पलटवार अशोक चव्हाण के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कांग्रेस ने इतिहास का हवाला दिया। पार्टी ने स्पष्ट किया कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम (महिला आरक्षण विधेयक) 2023 में संसद में सर्वसम्मति से पारित हुआ था, जिसमें कांग्रेस का भी पूर्ण समर्थन था। कांग्रेस ने याद दिलाया कि भारत में महिला आरक्षण की नींव पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने रखी थी, जिन्होंने स्थानीय निकायों में महिलाओं को प्रतिनिधित्व दिलाने की पहल की थी।
क्या था अशोक चव्हाण का बयान? हाल ही में एक कार्यक्रम के दौरान अशोक चव्हाण ने केंद्र सरकार के महिला आरक्षण कानून को ऐतिहासिक बताया था। उन्होंने विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए कहा था कि विपक्ष अपने राजनीतिक अहंकार के कारण महिलाओं के हक में बाधा बन रहा है। चव्हाण ने दावा किया कि यह कानून 2029 के चुनावों से महिलाओं की स्थिति को पूरी तरह बदल देगा।
अवसरवादी राजनीति का आरोप 2024 में भाजपा में शामिल होने के बाद से ही अशोक चव्हाण लगातार कांग्रेस पर हमलावर रहे हैं। वहीं, कांग्रेस अब उन्हें अवसरवादी साबित करने का कोई मौका नहीं छोड़ रही है। पार्टी का कहना है कि नई राजनीतिक राह चुनने के चक्कर में चव्हाण ने न केवल अपनी विचारधारा को छोड़ा, बल्कि अपने पिता के राजनीतिक इतिहास का भी अपमान किया है।
मा. अशोकराव,
— Maharashtra Congress (@INCMaharashtra) April 18, 2026
ज्या कॉंग्रेस पक्षाशी आपले वडील स्व. शंकरराव चव्हाण साहेब आयुष्यभर एकनिष्ठ राहीलेत, त्याच कॉंग्रेस पक्षासोबत आपण गद्दारी करण्याअगोदर २०२३ मध्येच, “नारी शक्ती वंदन अधिनियम - २०२३”, म्हणजेच लोकसभा व विधानसभेच्या जागांमध्ये महिलांसाठीचे ३३% आरक्षण हे संसदेत एकमताने… https://t.co/SNBs20Onc7 pic.twitter.com/gU5Ew8pgQ6
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