सम्राट चौधरी के शपथ लेते ही गरमाई बिहार की सियासत, पप्पू यादव का तीखा बयान- अब कुछ लोगों को यह पच नहीं रहा
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बिहार की राजनीति में एक बड़ा अध्याय शुरू हुआ है। सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेते ही राज्य का सियासी पारा चढ़ गया है। इस बदलाव ने न केवल सत्ता के गलियारों में हलचल मचा दी है, बल्कि बयानों का दौर भी तेज कर दिया है।

पप्पू यादव का मुखर समर्थन पूर्णिया के सांसद पप्पू यादव ने सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनने का स्वागत किया है। उन्होंने इसे सामाजिक न्याय और पिछड़े वर्ग के सशक्तिकरण से जोड़ते हुए कहा कि एक साधारण पृष्ठभूमि और ओबीसी परिवार से आने वाले नेता को काम करने का अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने आलोचकों पर कटाक्ष करते हुए कहा कि, अगर ओबीसी का बेटा मुख्यमंत्री बन गया है, तो उसे कुछ दिन काम करने का मौका दीजिए।

हमाम में सब नंगे हैं पप्पू यादव ने उन नेताओं पर तीखा हमला बोला है जो सम्राट चौधरी को अपराधी बताकर निशाना साध रहे हैं। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि राजनीति में हर दल पर सवाल उठते रहे हैं। हमाम में सब नंगे हैं कहते हुए उन्होंने तंज कसा कि केवल एक व्यक्ति को निशाना बनाना अनुचित है। उनका मानना है कि कुछ राजनीतिक दलों को यह पच नहीं रहा कि एक साधारण परिवार का व्यक्ति सत्ता के सर्वोच्च शिखर पर कैसे पहुँच गया।

शराबबंदी पर कायम रहेगी सरकार मुख्यमंत्री बनते ही सम्राट चौधरी ने अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। उन्होंने घोषणा की है कि बिहार में शराबबंदी कानून पहले की तरह प्रभावी रहेगा। उन्होंने इसे समाज और महिलाओं के हित में लिया गया एक आवश्यक निर्णय बताया। उनके इस फैसले का जेडीयू नेता नीरज कुमार ने भी स्वागत किया है। नीरज कुमार ने कहा कि नशा मुक्त समाज ही महिलाओं के सम्मान और बिहार के विकास का आधार है।

सामने होंगी बड़ी चुनौतियां राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि सम्राट चौधरी के सामने चुनौतियां कम नहीं हैं। बेरोजगारी, शिक्षा, स्वास्थ्य और कानून व्यवस्था जैसे पुराने मुद्दे राज्य की जनता की प्राथमिकता हैं। नए मुख्यमंत्री को इन मोर्चों पर अपनी कार्यकुशलता साबित करनी होगी।

क्या नए युग की शुरुआत है? सम्राट चौधरी का मुख्यमंत्री बनना बिहार में जातीय और सामाजिक समीकरणों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। क्या यह बिहार की राजनीति में एक नए युग की शुरुआत है या महज एक अस्थायी बदलाव? इसका जवाब आने वाले समय और उनके द्वारा लिए जाने वाले फैसलों से मिलेगा। फिलहाल, बिहार की जनता और राजनीतिक जगत की नजरें नए मुख्यमंत्री की पहली कड़ी चुनौतियों पर टिकी हैं।

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