मध्यप्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल ने बोर्ड परीक्षाओं के परिणाम घोषित कर दिए हैं। 15 अप्रैल को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा जारी किए गए इन नतीजों ने राज्य की शिक्षा व्यवस्था की एक नई और सुखद तस्वीर पेश की है। इस साल का रिजल्ट न केवल ऐतिहासिक है, बल्कि नारी सशक्तिकरण की एक बड़ी मिसाल भी बनकर उभरा है।
स्वर्णिम मध्यप्रदेश की नई इबारत मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने परिणामों पर खुशी जताते हुए कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रभाव से अब किसी छात्र का साल खराब नहीं होता। परीक्षा के बाद द्वितीय अवसर की सुविधा ने बच्चों के भविष्य को सुरक्षित किया है। यह परिणाम राज्य में प्रतिभा और परिश्रम को मिल रहे समान अवसरों का प्रमाण है।
बेटियों का दबदबा: हर मोर्चे पर अव्वल परिणामों में बेटियों ने लड़कों को पीछे छोड़ते हुए अपनी शैक्षणिक श्रेष्ठता साबित की है। हाईस्कूल में छात्राओं का पास प्रतिशत 77.52 रहा, जबकि छात्रों का 69.31 रहा। हायर सेकेंडरी में भी छात्राएं 79.41 प्रतिशत के साथ आगे रहीं। मेरिट सूची में भी छात्राओं का भारी बहुमत उनकी बढ़ती भागीदारी को दर्शाता है।
प्रतिभा और खुशी: टॉपर्स ने गाड़े झंडे हाईस्कूल में पन्ना जिले की छात्रा प्रतिभा सिंह सोलंकी ने 500 में से 499 अंक हासिल कर राज्य में प्रथम स्थान प्राप्त किया। वहीं, हायर सेकेंडरी (वाणिज्य) में खुशी राय और चांदनी विश्वकर्मा ने 500 में से 494 अंक प्राप्त कर शीर्ष स्थान हासिल किया। इन बेटियों की सफलता ने ग्रामीण और अर्ध-शहरी प्रतिभाओं का लोहा मनवाया है।
सरकारी स्कूलों ने निजी स्कूलों को पछाड़ा इस साल शिक्षा व्यवस्था में आए सकारात्मक बदलावों का असर साफ दिखा। हाईस्कूल और हायर सेकेंडरी दोनों ही स्तरों पर सरकारी स्कूलों का पास प्रतिशत निजी स्कूलों से काफी बेहतर रहा। हायर सेकेंडरी में सरकारी स्कूलों का रिजल्ट 80.43 प्रतिशत रहा, जो शिक्षा विभाग की गुणवत्ता सुधारने की मुहिम की सफलता को रेखांकित करता है।
जनजातीय जिलों का शानदार प्रदर्शन सीमित संसाधनों के बावजूद जनजातीय बहुल जिलों ने चौंकाने वाले परिणाम दिए हैं। झाबुआ और अनूपपुर जैसे जिलों ने पास प्रतिशत में शीर्ष स्थान हासिल कर यह साबित कर दिया कि प्रतिभा किसी संसाधन की मोहताज नहीं होती।
फेल छात्रों को नई उम्मीद: द्वितीय अवसर परीक्षा जो विद्यार्थी इस बार सफल नहीं हो पाए, उनके लिए सरकार ने मई माह में द्वितीय अवसर परीक्षा का प्रावधान किया है। 7 मई 2026 से शुरू होने वाली यह परीक्षा असफल छात्रों को साल बचाने और अपने अंकों में सुधार करने का एक और मौका देगी।
एमपी बोर्ड के ये नतीजे केवल आंकड़ों का खेल नहीं हैं, बल्कि ये एक ऐसे मध्यप्रदेश का सपना साकार कर रहे हैं जहां शिक्षा का अधिकार और गुणवत्ता हर बच्चे तक समान रूप से पहुंच रही है।
*बोर्ड परीक्षा परिणामों में बेटियों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सफलता का परचम लहराया है, सभी प्रतिभाशाली बेटियों को हार्दिक बधाई व शुभकामनाएं : CM@DrMohanYadav51 @schooledump #CMMadhyaPradesh #MadhyaPradesh pic.twitter.com/OZQyiQeAcB
— Chief Minister, MP (@CMMadhyaPradesh) April 15, 2026
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