भारत और रूस के बीच रक्षा सहयोग ने एक ऐतिहासिक मोड़ ले लिया है। दोनों देशों ने रेलोस (RELOS) समझौते के तहत एक-दूसरे की सरजमीं पर अपने सैन्य बलों की तैनाती पर मुहर लगा दी है। इस समझौते के बाद अब भारत में रूसी सैनिक और रूस में भारतीय सैनिकों की मौजूदगी सामान्य बात होगी।
हालिया आधिकारिक दस्तावेजों के अनुसार, इस समझौते के तहत एक निश्चित समय पर किसी भी देश में अधिकतम 3,000 सैन्य कर्मी, 10 लड़ाकू विमान और पांच युद्धपोत तैनात किए जा सकेंगे। यह व्यवस्था संयुक्त सैन्य अभ्यास, प्रशिक्षण, मानवीय सहायता और आपदा राहत अभियानों के लिए बनाई गई है।
यह समझौता कुल 21 अनुच्छेदों में विभाजित है और इसकी अवधि पांच वर्षों के लिए निर्धारित की गई है। यदि दोनों पक्षों की ओर से कोई आपत्ति नहीं जताई जाती, तो यह करार स्वतः ही आगे बढ़ता रहेगा। यह व्यवस्था 12 जनवरी 2026 से प्रभावी हो चुकी है, जिसके बाद अब इसके विस्तृत नियमों को सार्वजनिक किया गया है।
इस पैक्ट के जरिए भारत और रूस के लिए एक-दूसरे के 40 से अधिक सैन्य अड्डों, हवाई पट्टियों और बंदरगाहों के दरवाजे खुल गए हैं। भारत को अब रूस के रणनीतिक आर्कटिक क्षेत्र और व्लादिवोस्तोक जैसे सुदूर पूर्वी बंदरगाहों तक सीधी पहुंच मिलेगी। वहीं, रूस को हिंद महासागर में भारतीय बंदरगाहों के जरिए महत्वपूर्ण लॉजिस्टिक और तकनीकी सहायता प्राप्त होगी।
समझौते के तहत दोनों देशों की सेनाएं एक-दूसरे के संसाधनों का उपयोग ईंधन भरने, युद्धपोतों की मरम्मत और राशन आपूर्ति के लिए कर सकेंगी। इसके अलावा, हवाई क्षेत्र के उपयोग और बंदरगाहों में जहाजों के प्रवेश को भी काफी सरल और सुगम बना दिया गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि रूस के साथ यह समझौता भारत की संतुलित विदेश नीति को दर्शाता है। अमेरिका के साथ पहले से मौजूद लेमोआ (LEMOA) समझौते के बाद, रूस के साथ यह नया करार साबित करता है कि भारत सैन्य जरूरतों के लिए किसी एक गुट पर निर्भर नहीं है और अपनी रणनीतिक स्वायत्तता को प्राथमिकता देता है।
यह समझौता फरवरी 2025 में मॉस्को में हस्ताक्षरित हुआ था और दिसंबर 2025 में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा के दौरान इसे अंतिम रूप दिया गया था। अब इसके क्रियान्वयन से दोनों देशों के बीच रक्षा तालमेल नई ऊंचाइयों पर पहुंच गया है।
🚨🇮🇳🇷🇺 India and Russia agree to station up to 3K troops on each other’s territory
— Sputnik India (@Sputnik_India) April 18, 2026
Up to 3,000 military personnel could be stationed on each other’s soil at any one time, in a significant boost to defence cooperation between the two long-standing strategic partners.
The… pic.twitter.com/YnD6XCCtY6
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