IPL 2008 का आगाज: जब आइकन प्लेयर्स के प्रयोग से शुरू हुई दुनिया की सबसे बड़ी क्रिकेट लीग की कहानी
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18 अप्रैल 2008 को जब आईपीएल के पहले संस्करण का बिगुल बजा, तो किसी को अंदाजा नहीं था कि यह केवल एक टूर्नामेंट नहीं, बल्कि क्रिकेट की दुनिया का गेमचेंजर साबित होगा। आरसीबी और केकेआर के बीच खेले गए पहले ही मैच में ब्रेंडन मैकुलम ने 158 रनों की तूफानी पारी खेलकर इस लीग की दिशा तय कर दी थी।

क्या था आइकन प्लेयर कॉन्सेप्ट?

आईपीएल की शुरुआत में बीसीसीआई ने भारतीय क्रिकेट के दिग्गज नामों को भुनाने के लिए आइकन प्लेयर का कॉन्सेप्ट पेश किया। इसके तहत सचिन तेंदुलकर, सौरव गांगुली, राहुल द्रविड़, युवराज सिंह और वीरेंद्र सहवाग जैसे खिलाड़ियों को उनके घरेलू शहरों की टीमों से जोड़ा गया।

इन खिलाड़ियों की नीलामी नहीं हुई थी, बल्कि इन्हें अपनी टीम के सबसे महंगे खिलाड़ी के वेतन से 15 प्रतिशत अधिक रकम दी गई थी। इस कदम का उद्देश्य इन सितारों की ब्रांड वैल्यू का इस्तेमाल करके लीग को लोकप्रिय बनाना था।

उम्मीदें ज्यादा, प्रदर्शन साधारण

आइकन प्लेयर्स के रूप में शामिल इन दिग्गजों का प्रदर्शन पहले सीजन में मिला-जुला रहा। वीरेंद्र सहवाग ने 406 रन बनाकर थोड़ा प्रभावित किया, लेकिन सचिन तेंदुलकर, सौरव गांगुली और युवराज सिंह बल्ले से कोई बड़ा कमाल नहीं दिखा सके।

इस प्रयोग की असफलता के बाद बीसीसीआई ने इसे दोबारा नहीं दोहराया और बाद के सीजन में यह व्यवस्था खत्म कर दी गई। वहीं, नीलामी में सबसे महंगे खिलाड़ी महेंद्र सिंह धोनी थे, जिन्हें चेन्नई सुपर किंग्स ने करीब 6 करोड़ रुपये में खरीदा था।

राजस्थान रॉयल्स का ऐतिहासिक उलटफेर

टूर्नामेंट में 8 टीमें शामिल थीं, जिनमें मुंबई इंडियंस सबसे महंगी टीम (111.9 मिलियन डॉलर) थी। हालांकि, क्रिकेट के जानकारों को चौंकाते हुए शेन वॉर्न की कप्तानी वाली राजस्थान रॉयल्स ने खिताब अपने नाम किया। फाइनल में उन्होंने धोनी की कप्तानी वाली चेन्नई सुपर किंग्स को मात दी।

शेन वॉर्न की चतुर कप्तानी, युवाओं को मौके देना और स्पिन का सटीक इस्तेमाल राजस्थान की जीत का मुख्य आधार बना। यूसुफ पठान ने फाइनल में हीरो बनकर इतिहास रच दिया।

क्यों खास था पहला सीजन?

आईपीएल 2008 ने सिर्फ एक टूर्नामेंट को जन्म नहीं दिया, बल्कि क्रिकेट के व्यावसायिक स्वरूप को बदल दिया। चेन्नई द्वारा बनाए गए 240 रन और आरसीबी का 82 रन पर ढेर होना, जैसी घटनाएं इस सीजन की यादें हैं। मैकुलम की वह पहली शतकीय पारी हो या धोनी की रिकॉर्ड नीलामी, सबने मिलकर आईपीएल को वह ब्रांड बनाया जो आज दुनिया भर में अपनी धाक जमाए हुए है।

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