एमएस यूनिवर्सिटी डांस विवाद: कला पर राजनीति हुई भारी, छात्रा ने बयां किया अपना दर्द
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बड़ौदा की एमएस यूनिवर्सिटी इन दिनों एक डांस वीडियो को लेकर चर्चा में है, जिसने कला, संस्कार और राजनीति के बीच एक तीखी बहस छेड़ दी है। आइए जानते हैं क्या है पूरा मामला।

क्या है वायरल वीडियो का सच? एमएस यूनिवर्सिटी के फैकल्टी ऑफ आर्ट्स में एक कल्चरल फेस्ट का आयोजन हुआ था। इस दौरान एक छात्रा ने बॉलीवुड फिल्म बेटा के गाने धक धक करने लगा पर डांस किया। यह कार्यक्रम अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) द्वारा आयोजित किया गया था। इस वीडियो के सामने आते ही सोशल मीडिया पर बवाल मच गया।

राजनीतिक दलों ने बनाया हथियार कांग्रेस और नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) से जुड़े लोगों ने इस वीडियो को सोशल मीडिया पर वायरल कर इसे अभद्र और संस्कारों के विरुद्ध करार दिया। वीडियो को राजनीतिक रंग देते हुए इसे एक बड़े विवाद में तब्दील कर दिया गया, जबकि छात्रा का कहना है कि उसका उद्देश्य सिर्फ अपनी कला का प्रदर्शन करना था।

रोते हुए छात्रा ने बताई अपनी आपबीती विवाद बढ़ने पर छात्रा ने वीडियो जारी कर अपना पक्ष रखा। वह भावुक थी और उसने बताया कि बिना उसकी अनुमति के वीडियो को वायरल किया गया। उसने कहा कि केवल एक गाने के चुनाव की वजह से उसे जिस तरह सार्वजनिक रूप से निशाना बनाया जा रहा है, वह अनुचित है। छात्रा ने स्पष्ट किया कि उसका किसी राजनीतिक दल से कोई लेना-देना नहीं है।

मानसिक दबाव और समाज से सवाल इस पूरे घटनाक्रम के बाद छात्रा गहरे मानसिक दबाव से गुजर रही है। उसने लोगों से अपील की है कि किसी की निजता का सम्मान करें और बिना सोचे-समझे वीडियो शेयर न करें। छात्रा ने समाज से तीखा सवाल पूछते हुए कहा कि अगर बॉलीवुड गानों पर डांस करना गलत है, तो क्या ऐसे गाने सुनना और बनाना भी बंद कर देना चाहिए?

राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का दौर मामले ने अब राजनीतिक मोड़ ले लिया है। ABVP नेता समर्थ भट्ट का आरोप है कि NSUI एक छात्रा की गरिमा को दांव पर लगाकर राजनीतिक एजेंडा चमका रही है। उन्होंने इसे नैरेटिव पॉलिटिक्स करार दिया है, जिसमें एक व्यक्तिगत परफॉरमेंस को गलत तरीके से पेश किया गया।

कला बनाम संस्कार की खींचतान यह विवाद अब एक गंभीर सवाल खड़ा कर रहा है। क्या कैंपस में दी जाने वाली कला की आजादी को राजनीति की भेंट चढ़ जाना चाहिए? एक तरफ छात्रा अपनी मानसिक शांति के लिए संघर्ष कर रही है, तो दूसरी तरफ राजनीतिक दल अपने फायदे के लिए इस मुद्दे को खींच रहे हैं। यह मामला सोशल मीडिया के उस दौर की कड़वी सच्चाई है, जहां एक पल का वीडियो किसी के जीवन को प्रभावित कर सकता है।

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