हाल ही में ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने अपनी शरीफ यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी पर हुए हमले की कड़ी निंदा करते हुए एक विवादित और दिलचस्प ट्वीट किया। उन्होंने इसे ईरान का एमआईटी (MIT) करार दिया और पैगंबर मोहम्मद का एक कथन उद्धृत करते हुए कहा, अगर ज्ञान आसमान में तारों (प्लीअडीज) तक भी चला जाए, तो ईरानी उसे हासिल कर लेंगे।
पश्चिमी खगोल विज्ञान में जिसे प्लीअडीज (Pleiades) कहा जाता है, भारतीय ज्योतिष में वह कृत्तिका नक्षत्र है। आइए जानते हैं कि यह नक्षत्र ईरान से लेकर भारत तक क्या मायने रखता है।
हजारों साल पहले, जब घड़ियाँ या कंपास नहीं थे, तब ईरान और अरब जगत के लिए कृत्तिका नक्षत्र ही लाइफलाइन था। लोग इसके उदय और अस्त को देखकर समय, मौसम और दिशा का सटीक अंदाजा लगाते थे।
अक्टूबर से मार्च के बीच यह नक्षत्र आसमान में सबसे अधिक चमकता था, जिससे किसानों को फसल की बुवाई और कटाई का सही समय पता चलता था। रेगिस्तान में यात्रियों और समुद्र में नाविकों के लिए यह ध्रुव तारे की तरह मार्गदर्शक का काम करता था। अरब जगत में इसे थुरैया (सुरैया या परवीन) के नाम से जाना जाता है।
भारतीय ज्योतिष में 27 नक्षत्रों की गणना में कृत्तिका तीसरा महत्वपूर्ण नक्षत्र है। वेदांग ज्योतिष और विष्णु पुराण में इसे प्रमुख स्थान प्राप्त है। अथर्ववेद में नक्षत्रों के आह्वान के समय सबसे पहले कृत्तिका का ही नाम लिया जाता है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, यह मेष और वृषभ राशि के मिलन बिंदु पर स्थित है, जो इसे अत्यंत शक्तिशाली बनाता है।
हिंदू धर्म में कृत्तिका केवल तारों का समूह नहीं, बल्कि छह दिव्य माताओं का प्रतीक है। पुराणों के अनुसार, भगवान कार्तिकेय का पालन-पोषण इन्हीं छह कृतिकाओं ने किया था, इसीलिए कार्तिकेय के छह मुख (षण्मुख) माने गए हैं। यह समूह मातृत्व, साहस और पालन-पोषण का प्रतीक माना जाता है। वहीं, ग्रीक पौराणिक कथाओं में इसे सेवन सिस्टर्स (सात बहनें) के रूप में देखा जाता है।
यह नक्षत्र वैज्ञानिकों के लिए भी कौतुक का विषय रहा है। 1610 में महान वैज्ञानिक गैलीलियो गैलीली ने अपनी दूरबीन से देखा कि कृत्तिका में केवल छह तारे ही नहीं हैं, बल्कि वहां 40 से अधिक तारे मौजूद हैं। गैलीलियो ने अपनी किताब सिडेरियस नन्सियस में दर्ज किया कि नंगी आंखों से हमें जो समूह दिखता है, वह वास्तव में एक विशाल खगोलीय परिवार है।
ईरानी विदेश मंत्री द्वारा इस नक्षत्र का जिक्र करना महज एक संयोग नहीं है। यह उनके सांस्कृतिक इतिहास का हिस्सा है। प्लीअडीज या कृत्तिका तक पहुँचने की बात ज्ञान की उस पराकाष्ठा को दर्शाती है, जिसे ईरानी अपनी पहचान मानते हैं। आज के आधुनिक युग में भले ही हमारे पास वेदर ऐप और गूगल मैप्स आ गए हों, लेकिन कृत्तिका का यह खगोलीय और पौराणिक महत्व आज भी मानव सभ्यता को प्रेरित करता है।
Israeli-U.S. aggressors have bombed the MIT of Iran. This follows attacks on other universities.
— Seyed Abbas Araghchi (@araghchi) April 6, 2026
1,400 years ago, Prophet Muhammad (PBUH) said that even if knowledge was situated in the distant Pleiades, Iranians would be capable of attaining it.
Aggressors will see our might. pic.twitter.com/Dn3hSCaBNv
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