नोएडा और फरीदाबाद में सैलरी संग्राम : उग्र प्रदर्शन, गाड़ियों में आग और ठप पड़ा कामकाज
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दिल्ली से सटे नोएडा और फरीदाबाद के औद्योगिक केंद्र आज भीषण हिंसा और अराजकता की चपेट में हैं। वेतन वृद्धि की मांग को लेकर पिछले तीन दिनों से चल रहा असंतोष आज सुबह हिंसक हो गया, जिससे पूरे एनसीआर की रफ्तार थम गई है।

सड़कों पर उतरा आक्रोश, गाड़ियों को किया आग के हवाले सोमवार की सुबह नोएडा के फेज-2 और सेक्टर-84 में हालात बेकाबू हो गए। प्रदर्शनकारी मजदूर शांतिपूर्ण धरने का रास्ता छोड़कर सड़कों पर उतर आए। स्थिति इतनी उग्र हो गई कि सेक्टर-59, 60 और 62 तक हिंसा की लपटें फैल गईं। प्रदर्शनकारियों ने खड़ी गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया और कई जगहों पर वाहनों के शीशे तोड़ दिए गए।

फैक्ट्रियों में कामकाज पूरी तरह ठप हिंसा का सीधा असर औद्योगिक उत्पादन पर पड़ा है। नोएडा के अधिकांश सेक्टरों में फैक्ट्रियां पूरी तरह बंद हो गई हैं। फरीदाबाद के सेक्टर-37 में भी स्थिति तनावपूर्ण है, जहां बड़ी कंपनियों के कर्मचारी काम छोड़कर सड़कों पर उतर आए हैं। प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस के साथ-साथ पीएसी और आरएएफ की भारी तैनाती कर दी है।

क्यों भड़के हैं कर्मचारी? प्रदर्शन में शामिल कर्मचारियों का कहना है कि बढ़ती महंगाई के बीच पुराने वेतन में गुजारा करना असंभव हो गया है। मजदूरों की मुख्य मांग न्यूनतम 20,000 रुपये वेतन की है। श्रमिकों का आरोप है कि जब उन्होंने अपने हक के लिए आवाज उठाई, तो उन्हें अपमानित किया गया और उनके साथ मारपीट की गई। यही कारण है कि अब कर्मचारी किसी भी मौखिक आश्वासन पर भरोसा करने को तैयार नहीं हैं और वे लिखित गारंटी की मांग पर अड़े हैं।

ट्रैफिक व्यवस्था चरमराई, वैकल्पिक मार्गों की सलाह प्रदर्शन के कारण नोएडा के सेक्टर-60 और 62 के मुख्य मार्गों पर भीषण जाम लग गया है। नोएडा पुलिस ने ट्रैफिक एडवाइजरी जारी करते हुए वाहनों को डायवर्ट किया है। सेक्टर-62 फोर्टिस हॉस्पिटल और सेक्टर-59 मेट्रो स्टेशन के पास से गुजरने वाले यात्रियों को वैकल्पिक रास्ते चुनने की सलाह दी गई है, क्योंकि तनावपूर्ण माहौल अभी भी बरकरार है।

प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती नोएडा और फरीदाबाद के सेक्टर फिलहाल किसी छावनी में बदल चुके हैं। अधिकारी वार्ता के जरिए समाधान निकालने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन प्रदर्शनकारी पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। कुछ स्थानों पर कारखानों में घुसकर प्रबंधन को घेरे जाने की खबरों ने कंपनी मालिकों की चिंता बढ़ा दी है। फिलहाल, यह देखना अहम होगा कि एनसीआर का यह औद्योगिक बेल्ट कब तक सामान्य हो पाता है।

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