बंगाल चुनाव: बिरयानी बनाम सर्जिकल स्ट्राइक , अमित शाह का ममता और कांग्रेस पर तीखा प्रहार
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पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के चुनावी माहौल में भाजपा ने अपनी आक्रामक रणनीति तेज कर दी है। पश्चिम बर्धमान में एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कांग्रेस की पूर्ववर्ती यूपीए सरकार और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) को राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर एक साथ घेरा।

आतंकवाद पर बिरयानी बनाम जीरो टॉलरेंस अमित शाह ने मनमोहन सिंह सरकार और ममता बनर्जी के दौर की तुलना प्रधानमंत्री मोदी के जीरो टॉलरेंस मॉडल से की। उन्होंने गरजते हुए कहा, मनमोहन सिंह की सरकार, जिसे ममता बनर्जी का समर्थन प्राप्त था, वह आतंकियों को बिरयानी परोसती थी। जब हमारे जवानों पर हमले होते थे, तब भी दिल्ली की सरकार ठोस कदम उठाने के बजाय नरमी बरतती थी। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस और टीएमसी ने हमेशा वोट बैंक की राजनीति के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा से समझौता किया है।

ऑपरेशन सिंदूर और मोदी का साहस पहलगाम आतंकी हमले का उल्लेख करते हुए शाह ने मोदी सरकार के साहस को रेखांकित किया। उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर का हवाला देते हुए बताया कि आज का भारत आतंकियों के हमले का जवाब हाथ पर हाथ रखकर नहीं देता, बल्कि दुश्मन के घर में घुसकर उसे करारा जवाब देता है। उन्होंने कहा कि यह ऑपरेशन इस बात का प्रमाण है कि भारत की नीति अब बदल चुकी है।

ममता बनर्जी पर तुष्टीकरण का आरोप गृह मंत्री ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर सीधा हमला बोलते हुए उन पर राष्ट्रविरोधी ताकतों के समर्थन का आरोप लगाया। शाह ने कहा कि ममता ने अपनी तुष्टीकरण की नीति के कारण बंगाल में अवैध घुसपैठ को बढ़ावा दिया और राष्ट्रीय सुरक्षा में लगी एजेंसियों, जैसे बीएसएफ का भी विरोध किया। उन्होंने टिप्पणी की, ममता दीदी को अपनी कुर्सी प्यारी है, इसलिए वे पाकिस्तान और आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख अपनाने वालों को कोसती रहती हैं।

सुरक्षा और विकास का वादा शाह ने जनता से 23 और 29 अप्रैल को होने वाले मतदान में सुरक्षा और विकास के लिए भाजपा को चुनने की अपील की। उन्होंने टीएमसी के सिंडिकेट राज और कांग्रेस के बिरयानी मॉडल को देश विरोधी बताते हुए भाजपा के डबल इंजन शासन को बंगाल के लिए एकमात्र विकल्प बताया। शाह ने स्पष्ट किया कि 5 मई को भाजपा सरकार बनने पर बंगाल को माफिया-मुक्त और सुरक्षित बनाया जाएगा।

राष्ट्रवाद का कार्ड राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि अमित शाह का यह भाषण भाजपा के उस बड़े नैरेटिव का हिस्सा है, जिसके तहत वे बंगाल चुनाव को महज एक क्षेत्रीय मुकाबला न रखकर देशभक्ति बनाम तुष्टीकरण की लड़ाई बना रहे हैं। ममता बनर्जी की बाहरी बनाम बंगाली वाली राजनीति को काटने के लिए भाजपा पूरी तरह से राष्ट्रवाद के कार्ड पर दांव लगा रही है। अब देखना यह होगा कि बंगाल की जनता इस मुद्दे पर अपना क्या फैसला सुनाती है।

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