चिकन कोरमा, गुलाब जामुन और पजामा: पाकिस्तान ने अमेरिका-ईरान शांति वार्ता का बनाया मजाक
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इस्लामाबाद में आयोजित अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता का आयोजन चर्चाओं के बजाय तमाशे के कारण सुर्खियों में है। इस ऐतिहासिक वार्ता को कवर करने पहुंचे विदेशी पत्रकारों ने पाकिस्तानी प्रशासन की अव्यवस्था और वहां मौजूद पत्रकारों के गैर-पेशेवर व्यवहार पर तीखी नाराजगी जताई है।

खाने-पीने में उलझे पाकिस्तानी पत्रकार

शांति वार्ता के दौरान जब दुनिया की नजरें बंद कमरों के पीछे होने वाली चर्चाओं पर टिकी थीं, वहीं स्थानीय पत्रकार खाने-पीने की चीजों को कवर करने में व्यस्त थे। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में पाकिस्तानी पत्रकारों को चिकन कोरमा, बिरयानी, कबाब और खास कॉफी का बखान करते देखा जा सकता है। वरिष्ठ पत्रकार असद तूर ने इस पर तंज कसते हुए कहा कि यह वार्ता नहीं, बल्कि एक शादी की दावत बन गई थी।

विदेशी पत्रकारों की झुंझलाहट

इस्लामाबाद पहुंचे विदेशी मीडिया कर्मियों का कहना है कि वे यहां गुलाब जामुन खाने नहीं, बल्कि खबरों के लिए आए थे। एक विदेशी पत्रकार ने हताशा में कहा, हम यहां बोर हो रहे हैं, हमारे पास कवर करने के लिए कुछ भी नहीं है। जिन्ना कन्वेंशन सेंटर में विदेशी मीडिया को मुख्य मंच से दूर रखा गया, जबकि बड़ी स्क्रीनों पर केवल पाकिस्तानी अधिकारियों के स्वागत सत्कार और सरकारी विज्ञापनों का लूप चलता रहा।

पजामा पहनकर कवरेज पर बवाल

इस आयोजन के दौरान पाकिस्तानी पत्रकार घरीदा फारूकी अपने पहनावे को लेकर सोशल मीडिया पर जमकर ट्रोल हो रही हैं। वे एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय इवेंट में हरे रंग का नाइट सूट (पजामा सेट) पहनकर पहुंच गईं। उनके इस ड्रेसिंग सेंस की आलोचना करते हुए लोगों ने इसे घोर गैर-पेशेवर करार दिया है। गौरतलब है कि फारूकी को हाल ही में तमगा-ए-इम्तियाज से नवाजा गया है।

भूतिया शहर बना इस्लामाबाद

एएफपी की रिपोर्ट के अनुसार, इस शांति वार्ता के लिए इस्लामाबाद को एक भूतिया शहर में तब्दील कर दिया गया था। सड़कों पर आम लोगों की आवाजाही बंद थी और हथियारबंद जवान गश्त कर रहे थे। मान्यता प्राप्त पत्रकारों को भी घंटों चेकपॉइंट्स पर रोका गया, जबकि वीआईपी काफिलों को प्राथमिकता दी गई।

अंततः, जो आयोजन मध्य पूर्व में शांति के लिए एक ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित हो सकता था, वह पाकिस्तान के कुप्रबंधन और मीडिया की बचकानी हरकतों के कारण केवल तमाशा बनकर रह गया। विदेशी पत्रकार इस बात से हैरान हैं कि कैसे एक संवेदनशील कूटनीतिक बैठक को केवल ब्रांडिंग और दावत के इवेंट में बदल दिया गया।

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