महिला आरक्षण बिल: 2029 के चुनावों से पहले लागू करने के लिए सरकार ने विपक्ष से मांगी मदद
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केंद्र सरकार ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम को जल्द से जल्द लागू करने की कवायद तेज कर दी है। इसी कड़ी में केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे को पत्र लिखकर सक्रिय सहयोग की मांग की है। सरकार का स्पष्ट मानना है कि यदि इस कानून को अभी प्रभावी नहीं बनाया गया, तो 2029 के आम चुनावों में इसका लाभ मिलना मुश्किल होगा।

विशेष सत्र में आम सहमति पर जोर

संसद का विशेष सत्र 16 अप्रैल से 18 अप्रैल, 2026 तक बुलाया गया है। इस सत्र का मुख्य एजेंडा महिला आरक्षण अधिनियम में जरूरी बदलावों पर आम सहमति बनाना है। मंत्री रिजिजू ने अपने पत्र में याद दिलाया कि 2023 में इस बिल का पारित होना तमाम राजनीतिक दलों की सामूहिक इच्छाशक्ति का परिणाम था। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस ऐतिहासिक कानून को पूरा करना देश की करोड़ों महिलाओं के प्रति सरकार का वादा है।

देरी पड़ी तो 2029 का लक्ष्य होगा दूर

सरकार चिंतित है कि यदि अब देरी की गई, तो यह कानून समय रहते लागू नहीं हो पाएगा। मूल कानून के प्रावधानों के अनुसार, महिला आरक्षण का लाभ 2027 की जनगणना और उसके बाद होने वाले परिसीमन (Delimitation) के बाद ही मिलना था, जिसका अर्थ था कि यह 2034 से पहले लागू नहीं हो सकता। सरकार इसे 2029 के लोकसभा चुनाव तक लाने के लिए कानून में संशोधन करना चाहती है।

विपक्ष से बातचीत के आरोप को नकारा

किरेन रिजिजू ने उन दावों को खारिज कर दिया कि सरकार विपक्ष के साथ सलाह-मशविरा नहीं कर रही है। उन्होंने बताया कि 19 मार्च, 2026 से ही समाजवादी पार्टी, डीएमके और एनडीए के घटक दलों के साथ कई दौर की बैठकें हो चुकी हैं। मंत्री ने दोहराया कि सरकार आगे भी रचनात्मक बातचीत के लिए पूरी तरह तैयार है।

816 सीटों का गणित और नया बदलाव

प्रस्तावित बदलावों के बाद लोकसभा सीटों की संख्या बढ़कर 816 होने की संभावना है, जिनमें से 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इसे लेकर सभी दलों से अपील की है। पीएम का कहना है कि 2029 में महिला आरक्षण का लागू होना भारत के लोकतांत्रिक संस्थानों में नई ऊर्जा का संचार करेगा और निर्णय लेने की प्रक्रिया में महिलाओं की भागीदारी को सुनिश्चित करेगा।

अब सबकी नजरें 16 अप्रैल से शुरू हो रहे तीन दिवसीय विशेष सत्र पर टिकी हैं, जहां सरकार इस बड़े सुधार को धरातल पर उतारने के लिए विपक्ष की भूमिका पर निर्भर करेगी।

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