ईरान-अमेरिका शांति वार्ता बेनतीजा: अमेरिका का बड़ा दावा- हमने दिया था बेस्ट ऑफर
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इस्लामाबाद में ईरान और अमेरिका के बीच चल रही हाई-प्रोफाइल शांति वार्ता विफल हो गई है। लंबे समय तक चली बातचीत के बाद भी दोनों देश किसी ठोस समाधान पर नहीं पहुंच सके, जिससे मिडिल ईस्ट में तनाव और गहरा गया है।

ट्रंप से लगातार संपर्क में थे वेंस अमेरिकी उप-राष्ट्रपति जेडी वेंस ने बताया कि वार्ता के दौरान वे लगातार डोनाल्ड ट्रंप के संपर्क में थे। 21 घंटे की अवधि में उन्होंने ट्रंप से 10 से अधिक बार फोन पर बात की। वेंस ने कहा कि हमने ईरान के सामने अब तक का सबसे बेहतरीन प्रस्ताव रखा था, लेकिन वे उसे मानने को तैयार नहीं हुए।

क्यों फेल हुई बातचीत? वार्ता के फेल होने के पीछे मुख्य कारण होर्मुज स्ट्रेट का विवाद है। ईरान इस महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते पर अपना पूर्ण नियंत्रण चाहता है, जिसे अमेरिका अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग मानकर किसी भी देश के कब्जे में देने से इनकार कर रहा है। साथ ही, ईरान ने अपने 6 अरब डॉलर के फ्रीज किए गए एसेट्स को तुरंत रिलीज करने की मांग रखी, जिसे अमेरिका ने ठुकरा दिया।

परमाणु हथियारों का मुद्दा बना रोड़ा जेडी वेंस ने स्पष्ट किया कि अमेरिका की एकमात्र प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि ईरान परमाणु हथियार न बनाए। वेंस ने कहा, हम चाहते थे कि ईरान परमाणु क्षमता हासिल करने की अपनी कोशिशों को पूरी तरह त्यागे, लेकिन वे इस पर सहमत नहीं हुए। यह असहमति ही समझौते के रास्ते में सबसे बड़ी दीवार बनी।

ईरान का पलटवार वार्ता टूटने के बाद ईरान ने अमेरिकी रवैये की आलोचना की। ईरानी विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने कहा कि अमेरिका ने इतनी कठोर शर्तें रखी थीं जिन्हें स्वीकार करना किसी भी संप्रभु देश के लिए असंभव है। ईरान ने साफ कर दिया कि वह दबाव में आकर कोई समझौता नहीं करेगा।

मिडिल ईस्ट पर मंडराया जंग का खतरा बातचीत विफल होने के साथ ही क्षेत्र में सैन्य हलचल बढ़ गई है। अमेरिकी युद्धपोतों ने होर्मुज स्ट्रेट को पार कर इलाके में घेराबंदी तेज कर दी है। विशेषज्ञ मान रहे हैं कि पिछले 40 दिनों की लड़ाई से कमजोर पड़ चुके ईरान के लिए यह कूटनीतिक विफलता बहुत भारी पड़ सकती है।

पाकिस्तान की भूमिका और आगे क्या? इस्लामाबाद में आयोजित इस बैठक में पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख असीम मुनीर भी मौजूद थे। पाकिस्तान अब भी उम्मीद लगाए बैठा है कि कूटनीतिक रास्ते बंद नहीं हुए हैं। हालांकि, जेडी वेंस का बिना किसी समझौते के अमेरिका वापस लौटना यह संकेत दे रहा है कि फिलहाल हालात और अधिक बिगड़ने की आशंका है।

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