नासिक की MNC में अंधेरा : यौन उत्पीड़न, धर्मांतरण का दबाव और महिला पुलिस का अंडरकवर ऑपरेशन
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महाराष्ट्र के नासिक से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां एक मल्टीनेशनल कंपनी (MNC) में काम करने वाली महिला कर्मचारियों ने अपने सीनियर स्टाफ और टीम लीडर्स पर यौन उत्पीड़न, मानसिक प्रताड़ना और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने के गंभीर आरोप लगाए हैं। पुलिस ने इस मामले में अब तक 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

महिला पुलिस का सीक्रेट मिशन पुलिस को जब कंपनी के अंदर बड़े पैमाने पर चल रहे शोषण की जानकारी मिली, तो उन्होंने एक अंडरकवर ऑपरेशन चलाया। सात महिला पुलिस अधिकारी भेष बदलकर कंपनी के अंदर दाखिल हुईं। उन्होंने वहां हो रही एक मीटिंग में हिस्सा लिया और आरोपी को महिला कर्मचारियों के साथ गलत व्यवहार करते रंगे हाथों पकड़ने में सफलता हासिल की।

क्या हैं गंभीर आरोप? पीड़ित महिलाओं (ज्यादातर 18 से 25 वर्ष की उम्र के बीच) ने आरोप लगाया है कि यह शोषण पिछले 2-3 वर्षों से चल रहा था। शिकायतों में रेप, पीछा करना (स्टॉकिंग), अश्लील टिप्पणी करना और गलत तरीके से छूने जैसे संगीन आरोप शामिल हैं।

सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि महिलाओं पर न केवल यौन शोषण किया गया, बल्कि उन्हें जबरन धार्मिक रीति-रिवाजों का पालन करने और अपना धर्म बदलने का दबाव भी डाला गया। कुछ पीड़िताओं ने जबरन मांसाहारी भोजन करने के लिए मजबूर किए जाने की बात भी कही है।

कौन हैं आरोपी? गिरफ्तार किए गए आरोपियों में आसिफ अंसारी, शफी शेख, शाहरुख कुरैशी, रजा मेमन और तौसीफ अत्तर जैसे नाम शामिल हैं। ये सभी कंपनी में टीम लीडर या इंजीनियर के पदों पर तैनात थे। पुलिस ने इस मामले में कुल 9 FIR दर्ज की हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि पुणे ऑफिस की एक महिला एचआर अधिकारी पर भी इन शिकायतों को अनदेखा करने और आरोपियों का साथ देने का मामला दर्ज किया गया है।

HR की मिलीभगत और सिस्टम पर सवाल पीड़ितों का कहना है कि उन्होंने कंपनी के एचआर डिपार्टमेंट को पहले भी शिकायतें की थीं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। पुलिस के अनुसार, एक सीनियर अधिकारी ने शिकायतों को दबाने की कोशिश की। अब पुलिस 40 से अधिक CCTV फुटेज और कॉल रिकॉर्ड्स खंगाल रही है ताकि सबूतों को पुख्ता किया जा सके।

SIT का गठन और आगे की कार्रवाई मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस कमिश्नर संदीप कार्णिक ने एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है, जिसका नेतृत्व एसीपी संदीप मिटके कर रहे हैं। पुलिस ने अन्य पीड़ितों से निर्भय होकर सामने आने की अपील की है और उनकी पहचान गुप्त रखने का वादा किया है। फिलहाल आरोपियों को पुलिस रिमांड पर लिया गया है, और जल्द ही और भी गिरफ्तारियां हो सकती हैं।

दूसरी ओर, आरोपियों के वकील का दावा है कि ये आरोप केवल ऑफिस के माहौल में हुई गलतफहमी का नतीजा हैं। बहरहाल, पुलिस की जांच अब इस बात पर केंद्रित है कि क्या यह कोई संगठित गिरोह था जो लंबे समय से ऑफिस की आड़ में महिलाओं को निशाना बना रहा था।

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