एलपीजी की अब नहीं होगी चिंता ईरान-अमेरिका के बीच तनाव और वैश्विक स्तर पर तेल की बढ़ती कीमतों के बीच भारत ने ऊर्जा के क्षेत्र में एक बड़ी उम्मीद जगाई है। केंद्रीय उपभोक्ता मामले और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रल्हाद जोशी ने एक ऐसी तकनीक साझा की है, जो रसोई की दुनिया बदल सकती है। अब बिना एलपीजी सिलेंडर के भी चूल्हे से वैसी ही नीली लपटें निकलेंगी, जैसी आप गैस स्टोव पर देखते हैं।
इंडक्शन से कैसे अलग है यह तकनीक? आप सोच रहे होंगे कि इंडक्शन तो पहले से बाजार में है, तो इसमें नया क्या है? अंतर स्पष्ट है। इंडक्शन पर बर्तन गर्म होता है, लेकिन इस नई तकनीक में आपको बिजली से चलने के बावजूद वैसी ही लौ (flame) दिखाई देगी, जैसी पारंपरिक गैस चूल्हे में होती है। यह तकनीक देखने में बिल्कुल एलपीजी जैसा अनुभव देती है, लेकिन इसके पीछे का ईंधन बिजली है।
पीएम सूर्य घर से आएगी बड़ी क्रांति केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने सोशल मीडिया पर इस तकनीक की तस्वीरें साझा करते हुए कहा कि वे इस नवाचार से बेहद प्रभावित हैं। उन्होंने भारतीय मैन्युफैक्चरर्स से अपील की है कि वे इस तकनीक को अपनाएं और देश के भीतर ही इसका बड़े पैमाने पर उत्पादन शुरू करें। इसे पीएम सूर्य घर योजना के साथ जोड़कर एलपीजी पर भारत की निर्भरता को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
हाइड्रोजन कुकिंग बनी नई चर्चा एलपीजी संकट से निपटने के लिए एक और तकनीक पर भी तेजी से काम हो रहा है, जिसे हाइड्रोजन कुकिंग यूनिट कहा जा रहा है। यह तकनीक पानी का उपयोग करके गैस पैदा करती है। जिस तरह से वैश्विक तेल सप्लाई बाधित होने पर गैस के दाम आसमान छूते हैं, ऐसी इनोवेटिव तकनीकें भविष्य में भारत को ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भर बनाने में गेम चेंजर साबित हो सकती हैं।
क्या है अगला कदम? मंत्री का स्पष्ट संदेश है कि भारत के तकनीकी स्टार्टअप्स को अब ऐसी खोजों पर जोर देना चाहिए जो आम आदमी का खर्चा घटाएं और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा दें। यदि यह फ्लेम-इलेक्ट्रिक स्टोव और हाइड्रोजन कुकिंग कम लागत में मध्यमवर्गीय परिवारों तक पहुंच जाती है, तो रसोई के बजट और पर्यावरण दोनों को बड़ा फायदा होगा।
Yesterday, an Indian company demonstrated an imported stove that uses electricity to generate flame-like burners, similar to LPG, for cooking. I was truly impressed by this innovative technology and would like to see Indian manufacturers adopt and scale it domestically.
— Pralhad Joshi (@JoshiPralhad) April 10, 2026
When… pic.twitter.com/AQaNePu9N4
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