पिता ने छोड़ा अपना सपना, बेटे ने रची इतिहास की दास्तां: मुकुल चौधरी की धोनी बनने की कहानी
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लखनऊ सुपर जायंट्स को हाल ही में एक हारे हुए मैच में रोमांचक जीत दिलाने वाले युवा खिलाड़ी मुकुल चौधरी इस समय चर्चा का केंद्र बने हुए हैं। उनकी जुझारू पारी ने न केवल टीम को जीत दिलाई, बल्कि उनके संघर्ष और बैकग्राउंड की कहानी भी लोगों को भावुक कर रही है।

धोनी मेरा आदर्श, फिनिशर बनना ही लक्ष्य मैच के बाद मुकुल ने खुलकर अपने क्रिकेटिंग सफर और आदर्शों के बारे में बात की। उन्होंने कहा, मैं हमेशा एमएस धोनी को अपना प्रेरणास्रोत मानता हूं क्योंकि मैं भी एक फिनिशर की भूमिका निभाना चाहता हूं। उनका हेलीकॉप्टर शॉट मेरा पसंदीदा है और जिस तरह से वे दबाव में टीम को जीत दिलाते थे, मैं भी बिल्कुल वैसा ही करना चाहता हूं।

पिता का त्याग और कठिन संघर्ष मुकुल ने अपने पिता के उस बलिदान के बारे में बताया, जिसके कारण आज वे इस मुकाम पर हैं। मुकुल के पिता का खुद क्रिकेटर बनने का सपना था, लेकिन गरीबी के कारण वे ऐसा नहीं कर सके। उन्होंने शादी से पहले ही तय कर लिया था कि वे अपने बेटे को क्रिकेटर बनाएंगे।

RAS की तैयारी छोड़ बेटे को दिया मौका मुकुल ने खुलासा किया कि उनके पिता कॉलेज में पढ़ाने के साथ-साथ RAS (राजस्थान प्रशासनिक सेवा) की तैयारी कर रहे थे। स्थिति ऐसी थी कि पिता या तो खुद का करियर चुन सकते थे या बेटे के क्रिकेट का खर्च उठा सकते थे। उन्होंने बिना झिझक अपनी पढ़ाई और भविष्य का त्याग किया। प्रॉपर्टी से संबंधित काम शुरू किया और 12 साल की उम्र में मुकुल को सीकर की SBS क्रिकेट एकेडमी में दाखिला दिलाया।

कौन हैं मुकुल चौधरी? 8 अगस्त 2004 को झुंझुनू में जन्मे मुकुल चौधरी एक विकेटकीपर-बल्लेबाज हैं। घरेलू क्रिकेट में राजस्थान के लिए खेलने वाले मुकुल ने अब तक फर्स्ट क्लास और लिस्ट ए क्रिकेट में अपने हाथ दिखाए हैं। टी20 फॉर्मेट में उनकी आक्रामक बल्लेबाजी का लोहा सभी मान रहे हैं। मौजूदा सीजन में उन्होंने आईपीएल में अपना डेब्यू किया है और अपनी प्रतिभा से सभी को प्रभावित किया है।

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