ईरान में सड़कों पर जनसैलाब, खामेनेई की शहादत के 40 दिन बाद बदली मिडिल ईस्ट की तस्वीर
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मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच ईरान की सड़कों पर गुरुवार को अभूतपूर्व भीड़ देखने को मिली। ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला सैयद अली खामेनेई और अन्य सैन्य अधिकारियों की मौत के 40 दिन पूरे होने पर पूरा देश शोक में डूब गया। तेहरान समेत सैकड़ों शहरों में लोग सड़कों पर उतरे और अपने पूर्व नेता के प्रति वफादारी की कसमें खाईं।

राष्ट्रपति ने किया नेतृत्व राजधानी तेहरान के रिपब्लिक स्क्वायर में एक विशाल स्मारक समारोह आयोजित किया गया, जिसमें ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन खुद मौजूद थे। यहां से एक विशाल मार्च निकाला गया, जो उस स्थान तक गया जहां अमेरिकी-इजरायली हमलों में खामेनेई ने जान गंवाई थी। सड़कों पर मौजूद लोग नारे लगा रहे थे और दिवंगत नेता के आदर्शों को आगे बढ़ाने का संकल्प ले रहे थे।

28 फरवरी का वो काला दिन 28 फरवरी को हुए हमलों ने ईरान को गहरे जख्म दिए थे। अमेरिका और इजरायल के उस सैन्य हमले में न केवल खामेनेई और उनके परिवार के सदस्य मारे गए, बल्कि मेजर जनरल अब्दोलरहीम मौसवी और रियर एडमिरल अली शामखानी जैसे शीर्ष कमांडर भी शहीद हो गए। सबसे दुखद घटना मिनाब के एक प्राइमरी स्कूल की थी, जहां हमले में 170 से अधिक मासूम बच्चों की मौत हो गई थी।

14 दिन का सीजफायर और अमेरिका की शर्तें इन भीषण हमलों के जवाब में ईरान ने इजरायल और अमेरिकी ठिकानों पर जोरदार मिसाइल और ड्रोन हमले किए। इस विनाशकारी संघर्ष के बाद, पाकिस्तान की मध्यस्थता में दोनों देशों के बीच 14 दिन का सीजफायर लागू हुआ है। ईरान का दावा है कि यह शांति समझौता तब संभव हुआ जब अमेरिका ने तेहरान के 10-सूत्रीय प्रस्तावों को स्वीकार किया।

खामेनेई की सोच अब भी जिंदा सीजफायर के बीच ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशन गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने एक कड़ा बयान जारी किया है। सेना का कहना है कि अयातुल्ला खामेनेई की मौत ने इस्लामी क्रांति को और अधिक मजबूत बना दिया है। सेना के अनुसार, प्रतिरोध और न्याय के लिए दिवंगत नेता का दृष्टिकोण आज भी देश के लिए मार्गदर्शक बना हुआ है। अब पूरी दुनिया की नजरें इस पर टिकी हैं कि क्या यह 14 दिन का संघर्ष विराम आगे चलकर पूर्ण शांति में बदल पाएगा।

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