हाथों में भी हो सकती है रेस्टलेस लेग सिंड्रोम की दस्तक, इग्नोर करना पड़ सकता है भारी
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क्या आप रात को बिस्तर पर लेटते ही अपने हाथों में अजीब सी बेचैनी और ऐंठन महसूस करते हैं? अगर हां, तो इसे महज थकान या विटामिन की कमी समझकर नजरअंदाज करना आपकी सेहत के लिए घातक हो सकता है। 55 वर्षीय चंद्रिका की कहानी हमें सिखाती है कि शरीर के संकेत कितने गहरे हो सकते हैं।

जब रातों की नींद हो गई गायब

स्वस्थ और अनुशासित जीवन जीने वाली चंद्रिका को अचानक अपने हाथों में असहनीय बेचैनी होने लगी। दिन भर सब ठीक रहता, लेकिन शाम ढलते ही उनके हाथों में न रोकी जा सकने वाली हलचल शुरू हो जाती। उन्हें बार-बार अपने हाथ हिलाने पड़ते ताकि कुछ पल का सुकून मिल सके। इस समस्या ने धीरे-धीरे उनकी रातों की नींद छीन ली।

गलत डायग्नोसिस और निराशा का दौर

चंद्रिका ने कई डॉक्टरों के चक्कर काटे। शुरुआती ब्लड टेस्ट में विटामिन B12 की कमी निकली, जिसके लिए उन्होंने सप्लीमेंट्स लिए। एक महीने बाद रिपोर्ट तो सामान्य हो गई, लेकिन हाथों की वह रहस्यमयी बेचैनी जस की तस बनी रही। अलग-अलग दवाओं के इस्तेमाल के बावजूद उनकी स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ, जिससे वे मानसिक रूप से भी थक चुकी थीं।

रेस्टलेस लेग सिंड्रोम का अनूठा मामला

अंत में, जब वे एक विशेषज्ञ न्यूरोलॉजिस्ट से मिलीं, तो बीमारी की असलियत सामने आई। आमतौर पर रेस्टलेस लेग सिंड्रोम (RLS) पैरों को प्रभावित करता है, लेकिन चंद्रिका के मामले में यह केवल हाथों तक सीमित था। डॉक्टर ने गौर किया कि उनकी समस्या सिर्फ रात में बढ़ती थी और अंगों को हिलाने से उनमें आराम मिलता था। यह RLS का क्लासिक लक्षण था।

आयरन की कमी बनी असली विलेन

गहन जांच में पता चला कि चंद्रिका के शरीर में सीरम फेरिटिन (आयरन का एक प्रकार) का स्तर काफी कम था। कई बार हीमोग्लोबिन सामान्य होने पर भी फेरिटिन की कमी शरीर में ऐसी गंभीर परेशानियां पैदा कर देती है। सही निदान मिलने के बाद उन्हें आयरन सप्लीमेंट्स और सिंड्रोम की विशिष्ट दवाएं दी गईं। सिर्फ एक महीने में ही उनकी नींद वापस लौट आई और वे पूरी तरह स्वस्थ महसूस करने लगीं।

इन संकेतों को न करें नजरअंदाज

यह मामला हमें बताता है कि हर बीमारी किताबों के नियमों पर नहीं चलती। अगर आपको भी रात में हाथ-पैरों में बेचैनी होती है जिसे हिलाने से थोड़ी राहत मिले, तो इसे हल्के में न लें। अक्सर लोग इसे गठिया (Arthritis) या न्यूरोपैथी समझकर गलत इलाज करवाते रहते हैं। ऐसे में हमेशा एक विशेषज्ञ डॉक्टर से परामर्श लें और फेरिटिन लेवल की जांच जरूर करवाएं। सही समय पर सही सलाह ही आपकी रातों की सुकून भरी नींद लौटा सकती है।

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