ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे तनाव के बीच, ईरान ने एक बार फिर अमेरिका की चुटकी ली है। ईरान ने दक्षिण अफ्रीका स्थित अपने दूतावास के जरिए अमेरिकी प्रशासन और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का मजाक उड़ाया है। यह टिप्पणी तब आई है जब ट्रंप प्रशासन द्वारा अमेरिकी सेना में शीर्ष सैन्य अधिकारियों को लगातार पद से हटाया जा रहा है।
दूतावास का तंज: रेजीम चेंज सफल रहा दक्षिण अफ्रीका में ईरानी दूतावास ने सोशल मीडिया पर अमेरिकी सैन्य नेतृत्व की एक तस्वीर साझा की। इस तस्वीर के साथ तंज कसते हुए लिखा गया, रेजीम चेंज सफलतापूर्वक हो गया। इसके साथ ही उन्होंने ट्रंप के चुनावी नारे MAGA और हंसने वाली इमोजी का इस्तेमाल किया। यह हमला सीधे तौर पर ट्रंप के उस दावे पर था, जिसमें वे लगातार ईरान में रेजीम चेंज (सत्ता परिवर्तन) की बात करते रहे हैं।
पेंटागन में बड़े बदलाव, कई जनरल बाहर हाल ही में पेंटागन में बड़े स्तर पर सैन्य अधिकारियों को हटाए जाने का सिलसिला चला है। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ के निर्देश पर आर्मी चीफ ऑफ स्टाफ जनरल रैंडी जॉर्ज को पद से हटा दिया गया। जॉर्ज के अलावा जनरल डेविड होडने और विलियम ग्रीन जूनियर को भी बाहर का रास्ता दिखाया गया। इससे पहले जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन सीक्यू ब्राउन और नेवी के शीर्ष अधिकारियों को भी हटाया जा चुका है।
अस्पष्ट वजहों से बढ़ी अटकलें अमेरिकी रक्षा विभाग ने इन वरिष्ठ अधिकारियों को हटाने के पीछे कोई स्पष्ट कारण नहीं बताया है। विश्लेषकों का मानना है कि इन बदलावों के पीछे ईरान के खिलाफ संभावित जमीनी कार्रवाई को लेकर अमेरिकी सेना के भीतर चल रहा आपसी मतभेद हो सकता है। हालांकि, आधिकारिक तौर पर अभी तक कोई पुष्टि नहीं हुई है और न ही हटाए गए अधिकारियों ने इस पर कोई टिप्पणी की है।
कैबिनेट में भी उथल-पुथल सैन्य नेतृत्व के साथ-साथ ट्रंप की कैबिनेट में भी बड़ा शेक-अप देखने को मिल रहा है। होमलैंड सिक्योरिटी चीफ क्रिस्टी नोएम की विदाई और अटॉर्नी जनरल पाम बॉन्डी को हटाए जाने के बाद अब एफबीआई डायरेक्टर काश पटेल और इंटेलिजेंस चीफ तुलसी गबार्ड को हटाए जाने की चर्चाएं जोरों पर हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप अपनी ईरान नीति को अमलीजामा पहनाने के लिए प्रशासन में बड़े फेरबदल कर रहे हैं।
युद्ध और वैश्विक संकट इजरायल और अमेरिका द्वारा 28 फरवरी को ईरान पर किए गए बड़े हमले में उसके सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई सहित करीब 48 शीर्ष नेता मारे गए थे। इसके बाद से जारी इस संघर्ष में अब तक 2100 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है। होर्मुज स्ट्रेट की नाकेबंदी के कारण दुनिया भर में तेल और गैस का संकट गहरा गया है और महंगाई आसमान छू रही है। फिलहाल जारी कूटनीतिक कोशिशों के बावजूद शांति की उम्मीद कम ही नजर आ रही है।
The regime change happened successfully.
— Iran Embassy SA (@IraninSA) April 3, 2026
MAGA😀 pic.twitter.com/R75aFdmSTN
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