क्या इज़राइल अब ईरान के ऊर्जा ठिकानों पर करेगा बड़ा हमला? US की हरी झंडी का है इंतजार!
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मध्य-पूर्व में तनाव अब बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। एक वरिष्ठ इज़राइली रक्षा अधिकारी के अनुसार, इज़राइल ईरान की तेल और गैस सुविधाओं को निशाना बनाने की व्यापक तैयारी कर चुका है। यह हमला अगले एक हफ्ते के भीतर हो सकता है, लेकिन फिलहाल इज़राइल को अमेरिका से आधिकारिक मंजूरी का इंतजार है।

ट्रम्प का 48 घंटे का अल्टीमेटम स्थिति तब और विस्फोटक हो गई जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान को महज 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया। ट्रम्प ने दो टूक शब्दों में कहा है कि समय तेजी से निकल रहा है और यदि ईरान ने अपनी गतिविधियां नहीं रोकीं, तो उसके बाद उस पर भारी तबाही का सामना करना पड़ेगा। इस चेतावनी ने वैश्विक बाजारों में हलचल मचा दी है।

ईरान का पलटवार: मिसाइलें और ड्रोन ईरान चुप बैठने वालों में से नहीं है। रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने तेल अवीव के पास स्थित किर्या सैन्य मुख्यालय के आसपास मिसाइलें दागी हैं। इसके अलावा, ईरान के देहदाश्त (Dehdasht) इलाके से झड़पों और धमाकों की खबरें आ रही हैं। ईरानी मीडिया ने दावा किया है कि ताजा हमलों में चार लोगों की मौत हुई है।

हवा में जंग: अमेरिकी जेट्स को हुआ नुकसान संघर्ष का दायरा आसमान तक फैल चुका है। हालिया हमलों में ईरान ने अपने नई खतम अल-अंबिया हवाई रक्षा प्रणाली का प्रदर्शन किया है। इसके जरिए ईरान ने एक अमेरिकी F-15E फाइटर जेट और एक A-10 वॉरथॉग को मार गिराने का दावा किया है। हालांकि, अमेरिकी पायलट सुरक्षित इजेक्ट होने में कामयाब रहे। दो ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टरों पर भी हमले की पुष्टि हुई है।

होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर मंडराता खतरा ईरान ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य को लगभग बंद कर दिया है। यह क्षेत्र दुनिया के कुल तेल और LNG (तरलीकृत प्राकृतिक गैस) की आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा संभालता है। यदि इज़राइल ईरानी ऊर्जा ठिकानों पर हमला करता है, तो वैश्विक तेल और गैस की कीमतों में ऐतिहासिक उछाल आना तय है, जिसका सीधा असर भारत समेत पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।

क्या यह एक बड़े युद्ध की शुरुआत है? इज़राइल की रणनीति अब पूरी तरह से ईरानी अर्थव्यवस्था की रीढ़ (ऊर्जा स्रोतों) को तोड़ने पर केंद्रित है। दूसरी ओर, ईरान ने नई स्वदेशी हवाई रक्षा प्रणालियों के जरिए अपनी शक्ति का प्रदर्शन किया है। अमेरिका की भूमिका इस पूरे मामले में किंगमेकर की है, क्योंकि इज़राइल का अगला कदम पूरी तरह से वाशिंगटन की प्रतिक्रिया पर निर्भर करता है। क्या यह सिर्फ दबाव बनाने की रणनीति है या दुनिया एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध की दहलीज पर खड़ी है? आने वाले कुछ घंटे बेहद निर्णायक होंगे।

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