10 दिन की डेडलाइन समाप्त: क्या 7 अप्रैल को ईरान पर बड़ा हमला करेगा अमेरिका?
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दुनिया की राजनीति में एक बार फिर युद्ध के बादल मंडरा रहे हैं। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर बेहद कड़ी चेतावनी दी है। ट्रंप ने साफ कर दिया है कि अगर ईरान ने 10 दिन की समय सीमा के भीतर होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को नहीं खोला, तो अमेरिका सैन्य कार्रवाई के लिए तैयार है।

पावर प्लांट डे और ब्रिज डे की धमकी

ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर ईरान को सख्त संदेश देते हुए कहा है कि अब समझौता करने का समय आ गया है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि रास्ता नहीं खोला गया, तो मंगलवार को अमेरिका ईरान के पावर प्लांट और बड़े पुलों को निशाना बनाएगा। ट्रंप ने इस संभावित सैन्य कार्रवाई को पावर प्लांट डे और ब्रिज डे का नाम दिया है।

10 दिन की मियाद खत्म, कोई समझौता नहीं

ट्रंप ने ईरान को होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने के लिए 10 दिन का अल्टीमेटम दिया था, जो सोमवार को समाप्त हो रहा है। इसके बावजूद दोनों देशों के बीच किसी भी प्रकार की सहमति नहीं बन पाई है। ट्रंप प्रशासन का स्पष्ट रुख है कि यदि ईरान पीछे नहीं हटता है, तो उसके बिजली, पानी और तेल से जुड़े बुनियादी ढांचे को तबाह कर दिया जाएगा।

ईरान के सबसे बड़े पुल पर पहले ही हो चुका है हमला

तनाव की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि हाल ही में ईरान के करज शहर में स्थित B1 ब्रिज पर अमेरिका और इजराइल ने हमला किया था। इस हमले में 136 मीटर ऊंचा और 1050 मीटर लंबा यह पुल पूरी तरह नष्ट हो गया था। करीब 3800 करोड़ रुपये की लागत से बने इस पुल के टूटने से इलाके की ट्रैफिक व्यवस्था पूरी तरह ठप हो गई है और दो लोगों की जान भी चली गई।

युद्ध अपराध का आरोप और जवाबी कार्रवाई की धमकी

ईरान ने ट्रंप की इस चेतावनी को सिरे से खारिज करते हुए इसे युद्ध अपराध करार दिया है। तेहरान का कहना है कि यदि अमेरिका उसके पावर प्लांट या नागरिक ढांचों को निशाना बनाता है, तो वह चुप नहीं बैठेगा। ईरान ने चेतावनी दी है कि हमले की स्थिति में वह इजराइल और खाड़ी देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर कड़ा पलटवार करेगा।

क्यों दुनिया के लिए खतरनाक है यह तनाव?

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है, जहाँ से दुनिया का 20 से 30 प्रतिशत तेल व्यापार होता है। यदि यह मार्ग बंद रहता है या युद्ध की स्थिति उत्पन्न होती है, तो वैश्विक तेल बाजार में भारी उछाल आएगा और पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था डगमगा सकती है।

पाकिस्तान, मिस्र और तुर्की जैसे देशों द्वारा की गई मध्यस्थता की तमाम कोशिशें फिलहाल विफल साबित हुई हैं। अब पूरी दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या 7 अप्रैल को हालात सामान्य होंगे या मध्य पूर्व एक बड़े सैन्य टकराव की ओर बढ़ जाएगा।

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