राजस्थान अब सीधे जुड़ेगा अरब सागर से: नेशनल वाटरवे-48 से बदलेगी राज्य की आर्थिक तस्वीर
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जयपुर: राजस्थान की पहचान जल्द ही केवल रेगिस्तान के रूप में नहीं, बल्कि एक ऐसे व्यापारिक केंद्र के रूप में होगी, जहां से बड़े पानी के जहाज गुजरेंगे। मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा ने राजस्थान को अरब सागर से सीधे जोड़ने वाली महत्वाकांक्षी परियोजना नेशनल वाटरवे-48 (NW-48) पर काम तेज कर दिया है।

क्या है नेशनल वाटरवे-48 का रूट?

इस परियोजना की योजना काफी ठोस है। प्रस्तावित जलमार्ग राजस्थान की जवाई और लूणी नदियों के नेटवर्क का उपयोग करते हुए गुजरात के कच्छ के रण तक जाएगा, जहां से यह सीधे अरब सागर में मिल जाएगा। सरकार का लक्ष्य इन नदी मार्गों को इस तरह विकसित करना है कि वहां आसानी से मालवाहक जहाज चल सकें।

आईआईटी मद्रास से मांगी विस्तृत रिपोर्ट

मुख्यमंत्री ने इस प्रोजेक्ट की तकनीकी और आर्थिक व्यवहार्यता जांचने के लिए आईआईटी मद्रास और भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण को जिम्मेदारी सौंपी है। सीएम ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि यह रिपोर्ट जल्द से जल्द पेश की जाए। वे यह जानना चाहते हैं कि इस रास्ते से माल ढुलाई कितनी सस्ती होगी और सड़कों की तुलना में यह कितना प्रभावी होगा।

औद्योगिक क्रांति का बनेगा आधार

इस जलमार्ग के शुरू होने से राजस्थान के उद्यमियों की निर्भरता सिर्फ ट्रकों और ट्रेनों पर नहीं रहेगी। यह प्रोजेक्ट विशेष रूप से पेट्रोकेमिकल्स, सीमेंट, खनिजों और रसायनों के व्यापार के लिए गेम-चेंजर साबित होगा। बाड़मेर की रिफाइनरी से लेकर राज्य के अन्य औद्योगिक क्षेत्रों तक, यह कॉरिडोर लॉजिस्टिक्स की लागत को भारी कमी लाएगा।

एमओयू के बाद अब एक्शन मोड में सरकार

इस प्रोजेक्ट के लिए 27 अक्टूबर 2025 को एक महत्वपूर्ण समझौता (MoU) किया गया था। अब सीएम भजन लाल शर्मा इसे धरातल पर उतारने के लिए पूरी तरह एक्शन मोड में हैं। हाल ही में हुई हाई-लेवल मीटिंग में मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे, जहां इस प्रोजेक्ट को राज्य के विकास की नींव बताया गया।

रोजगार और विकास के नए द्वार

मुख्यमंत्री का मानना है कि यह जलमार्ग न केवल राजस्थान की अर्थव्यवस्था को रफ्तार देगा, बल्कि पड़ोसी राज्यों के व्यापारियों के लिए भी व्यापार के नए रास्ते खोलेगा। सीधी समुद्री कनेक्टिविटी मिलने से बंदरगाहों तक पहुंच आसान होगी, जो राज्य में रोजगार के नए अवसर पैदा करने और औद्योगिक विकास की गति को दोगुना करने में मददगार साबित होगा।

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