नई दिल्ली: भारत को अगर वैश्विक रक्षा बाजार में सुपरपावर बनना है, तो अपनी पुरानी औद्योगिक क्षमताओं को नए पंख देने होंगे। वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने देश की रक्षा आत्मनिर्भरता को लेकर एक बड़ा विजन साझा किया है। उनका मानना है कि भारत की 41 ऑर्डनेंस फैक्ट्रियां ही देश को रक्षा क्षेत्र में सिरमौर बना सकती हैं।
इतिहास से सीख और आज की जरूरत अनिल अग्रवाल ने इतिहास का हवाला देते हुए कहा कि पुराने समय में राजाओं-महाराजाओं की असली ताकत उनके हथियार, घोड़े और तोपें थीं। आज के दौर में भी वही सिद्धांत लागू होता है। उन्होंने कहा कि आज रक्षा उपकरणों के मामले में आत्मनिर्भर होना सिर्फ एक विकल्प नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए मजबूरी बन गया है।
41 फैक्ट्रियों में छिपा है गोल्डमाइन अग्रवाल ने अपनी हालिया यात्राओं का जिक्र करते हुए कहा कि जब उन्होंने जबलपुर और भुसावल जैसी सरकारी ऑर्डनेंस फैक्ट्रियों का दौरा किया, तो वहां मौजूद विशाल इंफ्रास्ट्रक्चर और टेक्नोलॉजी को देखकर वे दंग रह गए। उनके अनुसार, ये फैक्ट्रियां अपने आप में किसी बड़े शहर की तरह हैं, जहां बेहतरीन मैनपावर और हुनरमंद लोग मौजूद हैं।
निजी हाथों में जाते ही बढ़ेगा 10 गुना प्रोडक्शन वेदांता चेयरमैन का दावा है कि अगर इन 41 सरकारी फैक्ट्रियों की बागडोर निजी हाथों में सौंपी जाए, तो इनका उत्पादन 10 गुना तक बढ़ सकता है। उनका कहना है कि सरकारी ढांचे की कमियों को दूर करने के लिए प्राइवेट सेक्टर की दक्षता और आधुनिक प्रबंधन की सख्त जरूरत है।
एयर इंडिया मॉडल: स्वदेशी हथियारों के लिए नया रास्ता अग्रवाल ने इन फैक्ट्रियों के निजीकरण के लिए एयर इंडिया मॉडल को अपनाने की सलाह दी है। उन्होंने जोर दिया कि सरकार को बहुत स्मूथ तरीके से इनका आधुनिकीकरण करना चाहिए। समय की मांग है कि हम जमीन, हवा और पानी—तीनों मोर्चों पर पूरी तरह स्वदेशी हथियारों से लैस हों।
जीडीपी और नौकरियों में आएगा बड़ा उछाल अनिल अग्रवाल का मानना है कि यदि सरकार और निजी क्षेत्र मिलकर काम करें, तो भारत न केवल अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करेगा, बल्कि रक्षा निर्यात (Defence Export) के जरिए अपनी जीडीपी में बड़ा योगदान देगा। यह मॉडल न केवल देश को सुरक्षित करेगा, बल्कि करोड़ों युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा करेगा। पीएम मोदी के आत्मनिर्भर भारत के सपने को हकीकत में बदलने के लिए अब केवल सटीक एग्जीक्यूशन की जरूरत है।
*In today’s geopolitics, there is a renewed focus on the need for self-sufficiency in defence equipment. If we look at India’s history, the most important thing for our Kings and rulers was their defence equipment, whether swords, horses or cannons. This was the foundation of… pic.twitter.com/gnyNwrDlfG
— Anil Agarwal (@AnilAgarwal_Ved) April 3, 2026
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