सम्मान नहीं मिला तो मैं चला... : करियर के आखिरी दिनों पर छलका युवराज सिंह का दर्द, विराट-शास्त्री पर उठाए सवाल
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भारतीय क्रिकेट इतिहास के सबसे बेहतरीन मैच विनर्स में से एक युवराज सिंह ने अपने करियर के अंतिम दौर को लेकर एक बड़ा खुलासा किया है। कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी को मात देकर मैदान पर वापसी करने वाले युवी ने बताया कि कैसे उन्हें टीम मैनेजमेंट से उपेक्षा का सामना करना पड़ा था।

कोहली और शास्त्री से थी नाराजगी युवराज सिंह ने एक इंटरव्यू में बताया कि जब वे टीम इंडिया में वापसी की कोशिश कर रहे थे, उस समय कप्तान विराट कोहली और कोच रवि शास्त्री के साथ उनकी बातचीत का स्तर जीरो था। युवी ने कहा कि उस दौरान उन्हें एनसीए (NCA), कप्तान और कोच से अपनी भविष्य की योजनाओं को लेकर कोई स्पष्टता नहीं मिली थी।

कुछ तो सम्मान मिलना चाहिए था युवराज ने अपना दर्द बयां करते हुए कहा, मैं 36-37 साल का था और समझ नहीं पा रहा था कि क्या करूं। मैंने इतने लंबे समय तक देश के लिए क्रिकेट खेला था, क्या मुझे इतना सम्मान नहीं मिल सकता था कि वे मुझे साफ तौर पर बता सकें? युवराज के अनुसार, उन्हें टीम की योजनाओं से पूरी तरह अंधेरे में रखा गया था।

धोनी ने दिखाया आईना ऐसी कठिन स्थिति में युवराज ने पूर्व कप्तान एमएस धोनी से बात की। युवी ने बताया, धोनी उस समय कप्तान नहीं थे, लेकिन उन्हें पता था कि पर्दे के पीछे क्या चल रहा है। उन्होंने मुझे सच्चाई से रूबरू कराया और स्पष्ट दृष्टिकोण दिया। धोनी से बात करने के बाद ही मुझे चीजें समझ आईं।

फिटनेस टेस्ट पास किया, अब फैसला आपका है युवराज ने बताया कि उन्हें एनसीए से कहा गया था कि अगर वे फिटनेस टेस्ट पास नहीं कर पाते हैं तो उन्हें रिटायर हो जाना चाहिए। इस पर युवी ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा, मैंने टेस्ट पास कर लिया। मैंने उनसे साफ कहा कि रिटायर कब होना है, यह मेरा फैसला होगा। अगर आप मुझे टीम में नहीं चाहते, तो मैं खुद चला जाऊंगा।

क्रिकेट का एक जादुई सफर युवराज सिंह का करियर उतार-चढ़ाव भरा रहा। 2011 वर्ल्ड कप के दौरान कैंसर से जूझते हुए भारत को चैंपियन बनाने वाले सिक्सर किंग ने 40 टेस्ट, 304 वनडे और 58 टी20 मैच खेले। उनके नाम वनडे में 8701 रन और 111 विकेट दर्ज हैं। 2007 टी20 वर्ल्ड कप में एक ओवर में 6 छक्के जड़कर उन्होंने इतिहास रचा था। अफसोस की बात यह रही कि इतना बड़ा योगदान देने वाले खिलाड़ी को करियर के अंत में वह सम्मान नहीं मिला, जिसके वे हकदार थे।

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