होर्मुज संकट के बीच भारत-रूस की तेल डिप्लोमेसी : ट्रंप और पश्चिमी देशों की घेराबंदी बेअसर
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मध्य-पूर्व में जारी युद्ध और होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने से उपजे ऊर्जा संकट के बीच भारत ने खुद को सुरक्षित रखने का अभेद्य किला बना लिया है। जहां दुनिया भर में तेल और गैस की किल्लत हाहाकार मचा रही है, वहीं भारत ने नेबरहुड फर्स्ट नीति के तहत नेपाल, श्रीलंका और बांग्लादेश को भी ईंधन की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की है।

रूस बना भारत का एनर्जी सुरक्षा कवच भारत की इस सफलता के पीछे रूस का हाथ है। अमेरिका की तरफ से रूसी तेल पर मिली 30 दिनों की विशेष छूट का भारत ने भरपूर फायदा उठाया है। फरवरी 2026 में भारत ने रूस से रोजाना 10.6 लाख बैरल कच्चा तेल खरीदा था, जो मार्च में बढ़कर 20.6 लाख बैरल प्रतिदिन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है।

होर्मुज का तोड़ और बढ़ती दोस्ती युद्ध के चलते ईरान, इराक, कुवैत और सऊदी अरब से भारत की तेल खरीद में भारी गिरावट आई है। इस गैप को भरने के लिए रूस ने न केवल तेल, बल्कि एलपीजी (LPG) की सप्लाई बढ़ाने का भी भरोसा दिया है। रूस के डिप्टी पीएम डेनिस मांतुरोव के हालिया भारत दौरे ने इन व्यापारिक संबंधों को नई ऊर्जा दी है।

प्रतिबंधों को मात, रिकॉर्ड के करीब सप्लाई दिलचस्प बात यह है कि नवंबर 2025 में अमेरिकी प्रतिबंधों के डर से भारत ने रूसी तेल से थोड़ी दूरी बना ली थी, जिससे आयात 18.5 लाख बैरल से घटकर 10.6 लाख बैरल पर आ गया था। हालांकि, युद्ध शुरू होने और अमेरिकी प्रतिबंधों में ढील मिलते ही भारत ने अपनी रणनीति बदली और अब यह आयात मई 2022 के ऐतिहासिक रिकॉर्ड (21.5 लाख बैरल) के बेहद करीब पहुंच गया है।

ईरानी तेल का मोड़ और चीन का खेल ऊर्जा बाजार के बदलते समीकरणों के बीच एक चौंकाने वाली घटना भी सामने आई है। 6 लाख टन कच्चा तेल लेकर भारत आ रहे ईरानी जहाज पिंग शुन ने अचानक अपना रास्ता बदल लिया है। 4 अप्रैल को गुजरात पोर्ट पहुंचने वाला यह जहाज अब चीन के डोंगयिंग की ओर बढ़ गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि पेमेंट से जुड़ी दिक्कतों के चलते ईरान को अपना जहाज चीन की तरफ मोड़ना पड़ा है।

निष्कर्ष होर्मुज स्ट्रेट के संकट ने साबित कर दिया है कि भारत अब अपनी ऊर्जा सुरक्षा के लिए केवल खाड़ी देशों पर निर्भर नहीं है। रूस के साथ बढ़ती यह साझेदारी न केवल भारत की घरेलू जरूरतों को पूरा कर रही है, बल्कि रणनीतिक मोर्चे पर भी वैश्विक शक्तियों के सामने भारत की मजबूत स्थिति को दर्शाती है।

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