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मिडिल ईस्ट में अमेरिका की नई चाल अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया संबोधन ने वैश्विक राजनीति और बाजार में भूचाल ला दिया है। युद्ध खत्म करने के संकेत देकर तेल की कीमतों में गिरावट लाने वाले ट्रंप ने अचानक रुख बदलते हुए अगले 2-3 हफ्तों में ईरान पर भीषण हमले की चेतावनी दे दी है। इस पलटी मार बयानबाजी ने निवेशकों को सकते में डाल दिया है। आखिर ट्रंप को इस यू-टर्न की जरूरत क्यों पड़ी और कैसे यह फैसला पूरी दुनिया के लिए मुसीबत का सबब बन गया है?
बाजार में लूट और ट्रंप का मास्टरस्ट्रोक ट्रंप के युद्ध जारी रहने के ऐलान का सीधा असर ग्लोबल मार्केट पर पड़ा है। कच्चे तेल की कीमतें 98 डॉलर से उछलकर 106 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गईं। डाउ जोंस फ्यूचर में 600 अंकों की गिरावट आई, जबकि जापान और दक्षिण कोरिया के शेयर बाजारों में निवेशकों के 12 लाख करोड़ रुपये डूब गए। विशेषज्ञों का कहना है कि यह संबोधन अमेरिकी जनता के लिए नहीं, बल्कि वैश्विक बाजार में हेरफेर कर अपनी कंपनियों को मुनाफा दिलाने की एक सोची-समझी रणनीति थी।
ईरान में ग्राउंड ऑपरेशन की तैयारी? अमेरिका ने ब्रिटेन के बेस से बी-52 बॉम्बर और टैंक बस्टर कहे जाने वाले 12 से अधिक A-10C थंडरबोल्ट विमान तैनात किए हैं। इन विमानों की भारी तैनाती संकेत देती है कि अमेरिका केवल हवाई हमले नहीं, बल्कि ईरान के भीतर ग्राउंड ऑपरेशन (जमीनी युद्ध) की योजना बना रहा है। पेंटागन ने एक बेहद जोखिम भरा प्लान तैयार किया है, जिसके तहत अमेरिकी सैनिक ईरान की परमाणु साइटों में घुसकर संवर्धित यूरेनियम को जबरन बाहर निकालेंगे। यह इतिहास के सबसे खतरनाक सैन्य ऑपरेशनों में से एक साबित हो सकता है।
दुनिया का नुकसान, ईरान का फायदा आयरनी देखिए—ट्रंप ईरान को तबाह करने निकले थे, लेकिन उनकी नीतियों ने ईरान को अप्रत्याशित आर्थिक फायदा पहुँचाया है। होर्मुज जलडमरूमध्य, जो वैश्विक तेल व्यापार की लाइफलाइन है, अब ईरान के नियंत्रण में है। ईरान ने वहां से गुजरने वाले हर जहाज पर 20 लाख डॉलर का टोल वसूलना शुरू कर दिया है।
अनुमान है कि इस टोल और खाड़ी देशों के तेल मुनाफे में हिस्सेदारी के जरिए ईरान को साल भर में लगभग 185 अरब डॉलर का लाभ हो सकता है। यह रकम ईरान की कुल जीडीपी (375 अरब डॉलर) के मुकाबले बहुत बड़ी है। यानी, जो युद्ध ईरान की कमर तोड़ने के लिए शुरू हुआ था, वही युद्ध अब उसे क्षेत्र की नई आर्थिक महाशक्ति बनाने की दिशा में धकेल रहा है।
क्या खत्म होगा संकट? फिलहाल, अमेरिका के बिना 35 देशों की एक वर्चुअल बैठक चल रही है, जिसमें भारत भी शामिल है। दुनिया अब अमेरिका पर निर्भर रहने के बजाय होर्मुज का रास्ता खुलवाने के विकल्प तलाश रही है। ट्रंप के बयानों का यह मिसाइल खेल कब तक चलेगा और इससे वैश्विक अर्थव्यवस्था कितनी और आहत होगी, यह देखने वाली बात होगी। फिलहाल, निवेशक किसी भी बड़े कदम से बचने की तैयारी में हैं, क्योंकि ट्रंप के बयान पल भर में बाजार को फर्श से अर्श पर ला सकते हैं।
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— Zee News (@ZeeNews) April 2, 2026
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