दिल्ली। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) विधेयक को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने इस प्रस्तावित कानून को जवानों के मनोबल को चोट पहुँचाने वाला कदम करार देते हुए इसे संस्थागत अन्याय बताया है।
मुझे बोलने से रोकने की कोशिश राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार ने जानबूझकर इस विधेयक को उस दिन चर्चा और पारित कराने के लिए रखा है, जब वह असम के चुनावी दौरे पर हैं। उन्होंने कहा कि उन्होंने बुधवार को सरकार से आग्रह किया था कि वह इस विषय पर सदन में चर्चा करना चाहते हैं, इसलिए तिथि बदली जाए, लेकिन सरकार ने इसे अनसुना कर दिया।
विधेयक के बहाने भर्ती और पदोन्नति पर सवाल राहुल गांधी ने एक घायल जवान, असिस्टेंट कमांडेंट अजय मलिक का उदाहरण देते हुए कहा कि 15 साल की निष्ठापूर्ण सेवा के बाद भी जवानों को प्रमोशन नहीं मिलता। उन्होंने आरोप लगाया कि सीएपीएफ के शीर्ष पद केवल आईपीएस अधिकारियों के लिए आरक्षित हैं, जिससे बल के अपने अधिकारियों का नेतृत्व करने का अधिकार छीन लिया जाता है।
राष्ट्रीय सुरक्षा की नींव के साथ खिलवाड़ राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि जो जवान सीमा पर आतंकवाद और नक्सलवाद से लड़ते हैं, उनके सम्मान की बात आने पर सरकार मुंह फेर लेती है। उन्होंने चेतावनी दी कि यह केवल करियर में बाधा नहीं है, बल्कि देश की प्रथम रक्षा पंक्ति का मनोबल तोड़ने की खतरनाक कोशिश है, जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा की नींव कमजोर हो सकती है।
कांग्रेस का बड़ा वादा विपक्ष के नेता ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस इस विधेयक का पुरजोर विरोध कर रही है। उन्होंने वादा किया कि यदि केंद्र में उनकी पार्टी की सरकार बनती है, तो इस भेदभावपूर्ण कानून को तुरंत प्रभाव से समाप्त कर दिया जाएगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि जो देश के लिए अपना सर्वस्व बलिदान करता है, उसे अपनी फोर्स का नेतृत्व करने का पूरा अधिकार मिलना चाहिए।
सरकार का पक्ष दूसरी ओर, सरकार का तर्क है कि यह विधेयक सीएपीएफ के बेहतर प्रबंधन के लिए लाया गया है। सरकार का दावा है कि इस कानूनी बदलाव से बलों की कार्यकुशलता बढ़ेगी और प्रशासनिक ढांचे में सुधार होगा। गौरतलब है कि राज्यसभा इस विधेयक को पहले ही ध्वनिमत से पारित कर चुकी है।
असिस्टेंट कमांडेंट अजय मलिक जी ने नक्सली मुठभेड़ के दौरान IED ब्लास्ट में अपना एक पैर खो दिया - देश की रक्षा में सब कुछ दांव पर लगा दिया।
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) April 2, 2026
और इस बलिदान के बदले मिला क्या?
15 साल से अधिक की निष्ठापूर्ण सेवा के बावजूद - प्रमोशन नहीं, अपनी ही फोर्स को लीड करने का अधिकार नहीं।… pic.twitter.com/VGMdd1BTIp
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