8 लाख के बिल पर बीमा कंपनी की मनमानी: ई-जागृति पोर्टल ने कैसे दिलाई उपभोक्ता को बड़ी जीत?
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अक्सर संकट के समय जब आप अपनी हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी के भरोसे अस्पताल का बिल भरने की उम्मीद करते हैं, तो बीमा कंपनियां प्री-एग्जिस्टिंग इलनेस (पुरानी बीमारी) का बहाना बनाकर क्लेम रिजेक्ट कर देती हैं। ऐसी स्थिति में आम आदमी ठगा सा महसूस करता है। हालांकि, अब सरकारी ई-जागृति पोर्टल ने इन कंपनियों की मनमानी पर लगाम लगानी शुरू कर दी है।

क्या था गुरदासपुर का मामला? पंजाब के गुरदासपुर की एक महिला ने अपने परिवार के लिए हेल्थ इंश्योरेंस ले रखा था और समय पर प्रीमियम भी भर रही थी। जब उनके पति के इलाज में 7.20 लाख रुपये और पेसमेकर बदलने में 60 हजार रुपये का खर्च आया, तो कंपनी ने क्लेम खारिज कर दिया। कंपनी का तर्क था कि यह बीमारी पॉलिसी लेने से पहले की थी।

आयोग ने बीमा कंपनी को सिखाया सबक महिला ने हार नहीं मानी और ई-जागृति पोर्टल के जरिए डिस्ट्रिक्ट कंज्यूमर डिस्प्यूट्स रिड्रेसल कमीशन, गुरदासपुर में शिकायत दर्ज कराई। जांच के बाद आयोग ने कंपनी को कड़ी फटकार लगाई और कहा कि बिना ठोस सबूत के क्लेम खारिज करना गलत है। आयोग ने आदेश दिया कि कंपनी 45 दिनों के भीतर पूरा भुगतान करे, अन्यथा शिकायत की तारीख से 9% सालाना ब्याज देना होगा।

क्या है ई-जागृति पोर्टल? यह पोर्टल उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय की एक डिजिटल पहल है, जो जागो ग्राहक जागो अभियान का हिस्सा है। इसका उद्देश्य अदालती कार्यवाही को सरल, पारदर्शी और तेज बनाना है।

पोर्टल के मुख्य फायदे:

शिकायत के लिए जरूरी दस्तावेज: यदि आप भी किसी सेवा से परेशान हैं, तो शिकायत दर्ज करते समय ये दस्तावेज साथ रखें:

  1. आधार कार्ड या कोई मान्य सरकारी आईडी।
  2. सेवा या उत्पाद का बिल।
  3. इंश्योरेंस पॉलिसी की कॉपी।
  4. कंपनी के साथ हुई ईमेल या पत्राचार की कॉपी।
  5. रिजेक्शन लेटर या संबंधित मेडिकल रिपोर्ट।

ई-जागृति पोर्टल ने यह साबित कर दिया है कि अगर उपभोक्ता जागरूक हो और सही माध्यम का उपयोग करे, तो बड़ी से बड़ी बीमा कंपनियों की मनमानी को चुनौती दी जा सकती है।

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