बिहार में नर्सिंग शिक्षा का डिजिटल युग: अब एक क्लिक पर मिलेगी मान्यता और एनओसी
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बिहार के नर्सिंग संस्थानों के लिए अब फाइलों का बोझ ढोने और सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने का दौर खत्म हो गया है। स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने पटना में ऑनलाइन मान्यता प्रणाली का औपचारिक शुभारंभ किया है। इस नई डिजिटल व्यवस्था से राज्य के नर्सिंग कॉलेजों के लिए संबद्धता, एनओसी और अन्य प्रशासनिक प्रक्रियाएं बेहद आसान हो गई हैं।

656 कॉलेजों को मिलेगा सीधा लाभ वर्तमान में बिहार में 656 नर्सिंग कॉलेज संचालित हो रहे हैं, जिनमें 41,065 सीटों पर छात्र-छात्राएं चिकित्सा शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। इस डिजिटल प्लेटफॉर्म के आने से इन सभी संस्थानों को अब ऑनलाइन आवेदन और अप्रूवल की सुविधा मिलेगी। सरकार का मुख्य उद्देश्य इस प्रक्रिया में पारदर्शिता लाना और भ्रष्टाचार को पूरी तरह समाप्त करना है।

पारदर्शिता और जवाबदेही पर सख्त जोर स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि डिजिटल होने का अर्थ नियमों में ढील देना नहीं है। विभागीय सचिव लोकेश कुमार सिंह ने चेतावनी दी है कि अब निगरानी और अधिक सख्त होगी। नर्सिंग संस्थानों को अपनी लैब, फैकल्टी, बुनियादी ढांचे और अन्य सुविधाओं की वास्तविक जानकारी पोर्टल पर अपलोड करनी होगी। यह डेटा सार्वजनिक होगा, जिससे आम जनता भी घर बैठे यह देख सकेगी कि कौन सा संस्थान मानकों पर खरा उतर रहा है।

नीतीश सरकार का विजन: शिक्षा का विस्तार एक समय था जब नर्सिंग की पढ़ाई के लिए बिहार से छात्रों को दूसरे राज्यों का रुख करना पड़ता था। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सात निश्चय योजना के तहत नर्सिंग शिक्षा को प्राथमिकता दी गई, जिसका परिणाम है कि आज बिहार में सीटों की संख्या 41 हजार के पार पहुंच गई है। सरकार का अब लक्ष्य इन संस्थानों की संख्या को और बढ़ाना है ताकि स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए कुशल पैरामेडिकल एक्सपर्ट्स तैयार किए जा सकें।

तत्काल प्रभाव से अमल शुभारंभ कार्यक्रम के दौरान ही पांच नर्सिंग संस्थानों को ऑनलाइन एनओसी जारी कर इस नई व्यवस्था की शुरुआत की गई। विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल प्रणाली न केवल सरकारी प्रक्रिया में तेजी लाएगी, बल्कि इससे राज्य में नर्सिंग शिक्षा की गुणवत्ता में भी अभूतपूर्व सुधार देखने को मिलेगा।

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