90 दिन में खत्म होने वाली थी Apple, फिर कैसे बनी 3.6 ट्रिलियन डॉलर की कंपनी?
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दुनिया की दिग्गज टेक कंपनी Apple आज 50 साल की हो चुकी है। आज यह 3.6 ट्रिलियन डॉलर की कंपनी है, लेकिन एक दौर ऐसा भी था जब यह पूरी तरह बर्बाद होने की कगार पर थी। 1997 में Apple के पास सिर्फ 90 दिन का कैश बचा था। आइए जानते हैं उस चमत्कार की कहानी जिसने इसे इतिहास की सबसे मूल्यवान कंपनी बना दिया।

गैराज से शुरू हुआ सफर

1976 में स्टीव जॉब्स, स्टीव वोज्नियाक और रोनाल्ड वेन ने कैलिफोर्निया के एक छोटे से गैराज में Apple की नींव रखी थी। वोज्नियाक द्वारा डिजाइन किए गए Apple I ने पर्सनल कंप्यूटर की दुनिया में क्रांति ला दी। हालांकि, शुरुआत में यह महज एक प्रयोग था, जिसने भविष्य में पूरी दुनिया को बदलने का सपना देखा था।

जब फाउंडर को ही कर दिया गया बाहर

1983 में जॉब्स ने जान स्कली को कंपनी में शामिल किया, लेकिन जल्द ही दोनों के बीच मतभेद हो गए। 1985 में बोर्ड ने जॉब्स का साथ छोड़ दिया और उन्हें कंपनी से इस्तीफा देना पड़ा। जॉब्स के जाते ही Apple अपनी दिशा भटक गई और धीरे-धीरे पतन की ओर बढ़ने लगी।

निर्वासन का समय और नई सीख

कंपनी से बाहर होने के बाद जॉब्स ने Next नाम की कंपनी शुरू की और पिक्सार को सफलता की ऊंचाइयों पर पहुंचाया। इन 12 सालों में जॉब्स ने टेक्नोलॉजी और मैनेजमेंट की ऐसी समझ विकसित की, जो आगे चलकर Apple के लिए गेम चेंजर साबित हुई।

1997: बर्बादी के कगार पर Apple

90 के दशक के अंत तक Apple के हालात बदतर थे। कंपनी के उलझे हुए प्रोडक्ट्स के कारण मार्केट शेयर 5% से नीचे गिर गया था। 18 महीनों में 1 अरब डॉलर से ज्यादा का नुकसान हुआ और 1996 तक कंपनी के पास सिर्फ 90 दिन का कैश बचा था।

वापसी और 400 मिलियन डॉलर की डील

1996 में Apple ने Next को 400 मिलियन डॉलर में खरीदा और इसी के साथ स्टीव जॉब्स की वापसी हुई। 1997 में वे अंतरिम CEO बने। उन्होंने सबसे पहले माइक्रोसॉफ्ट के साथ 150 मिलियन डॉलर की डील की, जिसने एपल को डूबने से बचाया।

कड़े फैसले और थिंक डिफरेंट

जॉब्स ने कंपनी के दर्जनों प्रोडक्ट्स को हटाकर फोकस सिर्फ 4 मुख्य प्रोडक्ट्स पर किया। 1997 में उन्होंने मशहूर Think Different कैंपेन लॉन्च किया, जिसने ब्रांड की पुरानी चमक वापस लौटा दी। इसके बाद 1998 में आए iMac ने बाजार में तहलका मचा दिया और कंपनी मुनाफे में आ गई।

आज दुनिया की सबसे मूल्यवान कंपनी

आज Apple न केवल हार्डवेयर बल्कि अपनी सर्विस ईकोसिस्टम (आईफोन, आईक्लाउड, ऐप स्टोर) के दम पर 3.6 ट्रिलियन डॉलर की वैल्यू के साथ दुनिया के शिखर पर है। 50 साल का यह सफर साबित करता है कि सही विजन और साहसी फैसले किसी भी कंपनी को शून्य से शिखर तक पहुंचा सकते हैं।

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