ईरान के परमाणु ठिकानों पर अमेरिका का सीक्रेट ऑपरेशन : क्या ट्रंप की सेना बिछा पाएगी यूरेनियम को लूटने का जाल?
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ईरान के परमाणु ठिकानों से संवर्धित यूरेनियम (Enriched Uranium) को बाहर निकालना अमेरिका के लिए अब तक का सबसे कठिन और जोखिम भरा मिशन माना जा रहा है। सैन्य विशेषज्ञों का कहना है कि यह मिशन इम्पॉसिबल जैसा है, जिसमें भारी जान-माल के नुकसान का खतरा है।

अमेरिकी मास्टर प्लान के 4 चरण

इस ऑपरेशन को अंजाम देने के लिए अमेरिकी सेना ने चार चरणों वाली एक जटिल योजना तैयार की है:

  1. सुरक्षा घेरा: पहले चरण में कमांडोज परमाणु ठिकानों को चारों ओर से घेरेंगे ताकि IRGC (ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड) के जवाबी हमलों को रोका जा सके।
  2. टनल में घुसपैठ: डेल्टा फोर्स विशेष ड्रिलिंग और ब्लास्ट उपकरणों की मदद से सुरंगों के भारी दरवाजों को तोड़ेगी। रेडियोएक्टिव वातावरण में यह प्रक्रिया बेहद चुनौतीपूर्ण होगी।
  3. यूरेनियम का रिकवरी मिशन: डिपार्टमेंट ऑफ एनर्जी के विशेषज्ञ रेडिएशन सूट पहनकर अंदर जाएंगे और यूरेनियम को विशेष ट्रांसपोर्ट कंटेनरों में पैक करेंगे।
  4. एयरोलिफ्ट: अंतिम चरण में इन भारी कंटेनरों को हेलीकॉप्टर के जरिए सुरक्षित बाहर निकाला जाएगा। यदि यूरेनियम गैस फॉर्म में हुआ, तो उसे ठोस रूप में बदलने के लिए अतिरिक्त उपकरणों की जरूरत होगी।

ट्रंप के लिए डेथ ट्रैप साबित हो सकता है ऑपरेशन

इस मिशन की सफलता की गारंटी इसलिए भी कम है क्योंकि यूरेनियम की सटीक लोकेशन का अमेरिका को स्पष्ट पता नहीं है। अगर खुफिया जानकारी गलत निकली, तो अमेरिका के हाथ खाली रह सकते हैं। इसके अलावा, ईरान ने इसे अमेरिकी सेना के लिए मौत का जाल (डेथ ट्रैप) घोषित किया है।

ईरान की 10 लाख लड़ाकों वाली फौज

ईरान ने अमेरिकी ग्राउंड ऑपरेशन का जवाब देने के लिए 10 लाख से अधिक लड़ाके तैयार किए हैं, जिनमें IRGC और बेसिज मिलिशिया शामिल हैं। ईरान की तैयारी इतनी घातक है कि उन्होंने हेलीकॉप्टर और पैराट्रूपर्स को फंसाने के लिए विशेष जाल बिछा रखे हैं।

भौगोलिक चुनौती और ईरान की घातक रणनीति

ईरान के पास जमीन के नीचे 1,600 फीट गहरी सुरंगों का जाल है, जो उन्हें छिपकर हमला करने की सुविधा देता है। पर्शियन गल्फ में उनकी स्पीड बोट्स और मिसाइल बैटरी अमेरिकी युद्धपोतों के लिए बड़ा खतरा हैं।

सबसे बड़ी मुश्किल भौगोलिक परिस्थितियों की है। ईरान के ऊंचे पहाड़ और रेगिस्तान उनके सैनिकों के लिए घर की तरह हैं, जबकि अमेरिकी फौज के लिए ये बिल्कुल अनजान क्षेत्र हैं। ईरान का ढाई हजार साल पुराना युद्ध इतिहास यह बताता है कि उन्होंने हमेशा अपने दुश्मनों को कठिन भू-भाग में उलझाकर थकाया है। ट्रंप प्रशासन के लिए यह ऑपरेशन महज एक सैन्य मिशन नहीं, बल्कि एक अस्तित्व का सवाल बन सकता है।

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