होर्मुज संकट पर इस्लामाबाद की फ्लॉप डिप्लोमेसी: चाय-नाश्ते के बीच धड़ाम हुई पाकिस्तान की कूटनीति
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इस्लामाबाद में फिसले इशाक डार इस्लामाबाद में आयोजित चार देशों की हाई-प्रोफाइल बैठक के दौरान पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार का संतुलन बिगड़ा और वे सबके सामने जमीन पर गिर पड़े। विश्लेषकों का मानना है कि यह घटना केवल एक शारीरिक चूक नहीं, बल्कि पाकिस्तान की उस कमजोर कूटनीतिक हैसियत का जीवंत प्रतीक है, जो आज खुद को वैश्विक शांतिदूत के रूप में पेश करने की कोशिश कर रही है।

क्या था मकसद और क्या निकला नतीजा? सऊदी अरब, तुर्किये, मिस्र और पाकिस्तान के विदेश मंत्रियों की इस बैठक का एजेंडा ईरान-अमेरिका के बीच जारी तनाव को कम करना और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को दोबारा खोलना था। इस जलमार्ग के बंद होने से वैश्विक तेल बाजार में हाहाकार मचा हुआ है। हालांकि, बैठक का नतीजा शून्य रहा। बैठक खत्म होने तक जमीन पर शांति के कोई संकेत नहीं मिले, बल्कि युद्ध की आग और अधिक भड़क गई।

क्या था मिस्र का प्रस्ताव? कूटनीतिक गलियारों के अनुसार, बैठक से पहले मिस्र ने एक प्रस्ताव रखा था। इसमें होर्मुज में स्वेज नहर मॉडल की तर्ज पर जहाजों से फीस वसूलने का ढांचा बनाने, तुर्किये-मिस्र-सऊदी अरब का साझा कंसोर्टियम बनाने और पाकिस्तान को भी उसमें अहम भूमिका देने की बात थी। लेकिन ईरान ने अमेरिका द्वारा भेजी गई 15-सूत्रीय शर्तों को सिरे से खारिज कर दिया।

ईरान की कड़ी शर्तें अमेरिका के जवाब में ईरान ने अपना 5-सूत्रीय प्रस्ताव रखा है, जिसमें ईरानी अधिकारियों की हत्याएं बंद करने, युद्ध का हर्जाना देने और होर्मुज पर ईरान का पूर्ण संप्रभु अधिकार स्वीकार करने जैसी कड़ी शर्तें शामिल हैं। ईरान का रुख साफ है कि वह किसी भी बाहरी दबाव में झुकने को तैयार नहीं है।

अपनी ही पीठ थपथपाने में लगा पाकिस्तान बैठक की विफलता का आलम यह रहा कि इशाक डार ने गर्व से सोशल मीडिया पर दावा किया कि ईरान ने होर्मुज से पाकिस्तान के 20 जहाजों को गुजरने की अनुमति दी है। वैश्विक संकट सुलझाने के नाम पर बुलाई गई इस बैठक का अंत महज चंद जहाजों के लिए रास्ता मांगने तक सीमित रह गया, जिसने पाकिस्तान की कूटनीतिक सीमा को बेनकाब कर दिया।

बारूद के धुएं में दबी शांति की फाइलें जब इस्लामाबाद में बैठक चल रही थी, तभी इजरायल ने तेहरान पर मिसाइलों की नई लहर का ऐलान कर दिया। वहीं, अमेरिका ने मध्य पूर्व में अतिरिक्त मरीन तैनात कर दिए हैं। इन परिस्थितियों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि कूटनीति की फाइलें अब पूरी तरह से युद्ध के बारूद के नीचे दब चुकी हैं और पाकिस्तान की यह कोशिश केवल एक औपचारिक तमाशा बनकर रह गई है।

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