इस्लामाबाद: कहते हैं कि जब घर की नींव कमजोर हो, तो पड़ोसी के झगड़े सुलझाने की कोशिश अक्सर मजाक का पात्र बन जाती है। पाकिस्तान के साथ फिलहाल कुछ ऐसा ही हो रहा है। इस्लामाबाद में रविवार को एक हाई-प्रोफाइल बैठक आयोजित की गई, जिसमें दावा किया गया कि पाकिस्तान दुनिया को तीसरे विश्व युद्ध की आग से बचाएगा। लेकिन इस कवायद की शुरुआत ही एक ऐसी तस्वीर से हुई, जिसने पाकिस्तान की कूटनीतिक हैसियत की पोल खोल दी।
लड़खड़ाते कदम और गिरती साख बैठक की शुरुआत तब हुई जब पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार सऊदी अरब, तुर्किये और मिस्र के विदेश मंत्रियों का स्वागत करने पहुंचे। स्वागत के दौरान ही डार का संतुलन बिगड़ा और वे धड़ाम से फर्श पर गिर पड़े। सोशल मीडिया पर वायरल हुई यह तस्वीर महज एक शारीरिक चूक नहीं, बल्कि उस पाकिस्तान का प्रतीक बन गई जो खुद आर्थिक और राजनीतिक मोर्चे पर लड़खड़ा रहा है, लेकिन ईरान-अमेरिका जैसे महाशक्तिशाली देशों के बीच मध्यस्थ बनने का सपना देख रहा है।
होर्मुज संकट: मिशन शांति का सच इस बैठक में सऊदी अरब के विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान, तुर्किये के हाकन फिदान और मिस्र के बद्र अब्देलत्ती शामिल हुए। मुख्य एजेंडा ईरान युद्ध को रोकना और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को दोबारा खुलवाना था। इस जलमार्ग के बंद होने से वैश्विक तेल बाजार में हाहाकार मचा है। पाकिस्तान ने खुद को अमेरिका और ईरान, दोनों के करीब बताकर इस भूमिका को निभाने की कोशिश की, लेकिन परिणाम शून्य ही रहे।
ढाक के तीन पात: नतीजा रहा नगण्य दिन भर चली मैराथन बैठकों और भारी-भरकम दावों के बाद, जब नतीजे की बारी आई तो वह डार के लड़खड़ाते कदमों जैसा ही साबित हुआ। इशाक डार ने गर्व से बताया कि ईरान ने होर्मुज से 20 पाकिस्तानी झंडे वाले जहाजों को गुजरने की अनुमति दे दी है। यानी जिस मीटिंग को विश्व शांति के लिए बुलाया गया था, उसका हासिल सिर्फ पाकिस्तान के अपने चंद जहाजों का रास्ता साफ होना रहा। असल युद्ध और तनाव जस का तस बना हुआ है।
ईरान का रुख और अमेरिका की बेरुखी इस शांति प्रक्रिया की सबसे बड़ी विफलता यह थी कि युद्ध के मुख्य पक्ष—अमेरिका और इजरायल—इस मेज पर थे ही नहीं। अमेरिका ने पाकिस्तान के जरिए ईरान को 15-सूत्रीय एक्शन लिस्ट भेजी थी, जिसे ईरान ने सिरे से खारिज कर दिया। इसके उलट, ईरान ने अपना 5-सूत्रीय प्रस्ताव रख दिया है, जिसमें युद्ध के हर्जाने की मांग की गई है। इन दोनों के बीच का फासला इतना बड़ा है कि इस्लामाबाद की यह मीटिंग महज एक कूटनीतिक तमाशा बनकर रह गई।
धमाकों के बीच दम तोड़ती कूटनीति जब इस्लामाबाद में चाय की चुस्कियों के साथ शांति की बातें हो रही थीं, ठीक उसी समय तेहरान और इजरायल मिसाइलों की गूंज से दहल रहे थे। अमेरिका ने मध्य पूर्व में हजारों अतिरिक्त सैनिक तैनात कर दिए हैं। यह साफ है कि पाकिस्तान की मध्यस्थता मिसाइलों की गूंज के आगे बेहद कमजोर साबित हुई है। दुनिया भर के विशेषज्ञ अब पाकिस्तान की इस कागजी कूटनीति पर गंभीर सवाल उठा रहे हैं।
Pak Deputy PM Slips!!
— Rohit (@Iam_Rohit_G) March 29, 2026
He is Pakistan s Deputy Prime Minister and Foreign Minister Ishaq Dhar.
He was welcoming FMs of Saudi and Egypt.
He slipped and fell on the Carpet 🥲🥲pic.twitter.com/ixIdiuMgy7
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