भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने एक नया विवाद छेड़ दिया है। उन्होंने ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री और स्वतंत्रता सेनानी बीजू पटनायक पर जवाहरलाल नेहरू और अमेरिका (CIA) के बीच मध्यस्थ होने का गंभीर आरोप लगाया है। इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई है।
क्या है निशिकांत दुबे का दावा? दुबे का आरोप है कि 1962 के भारत-चीन युद्ध के दौरान नेहरू ने अमेरिकी पैसे का इस्तेमाल किया था। उनका कहना है कि उस समय बीजू पटनायक भारत और अमेरिका के बीच कड़ी का काम कर रहे थे। उन्होंने दावा किया कि नेहरू ने पत्रों के जरिए पटनायक को रक्षा मामलों पर अमेरिका से बातचीत के लिए भेजा था।
नंदा देवी में न्यूक्लियर डिवाइस का रहस्य भाजपा सांसद ने सनसनीखेज दावा करते हुए कहा कि अमेरिका और CIA के दबाव में नेहरू ने 1964 में उत्तराखंड की नंदा देवी पर्वत श्रृंखला में एक न्यूक्लियर डिवाइस (परमाणु उपकरण) लगाया था, जो आज भी लापता है। साथ ही, उन्होंने ओडिशा के चारबाटिया एयरबेस का उपयोग अमेरिकी जासूसी विमानों द्वारा किए जाने का भी आरोप लगाया है।
बीजेडी का तीखा पलटवार इन आरोपों से नाराज बीजेडी सांसद सस्मित पात्रा ने इसे बीजू पटनायक का अपमान बताया है। पात्रा ने कहा कि दुबे इतिहास को तोड़-मरोड़ कर पेश कर रहे हैं ताकि एक महान नेता को बदनाम किया जा सके। इसके विरोध में पात्रा ने निशिकांत दुबे के नेतृत्व वाली संसदीय स्थायी समिति से इस्तीफा देने की घोषणा कर दी है।
कौन थे बीजू पटनायक? बीजू पटनायक केवल ओडिशा के मुख्यमंत्री ही नहीं, बल्कि एक साहसी स्वतंत्रता सेनानी और कुशल पायलट भी थे। उन्होंने न केवल भारत की आजादी में योगदान दिया, बल्कि इंडोनेशिया को आजादी दिलाने में भी बड़ी भूमिका निभाई। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान सोवियत संघ के लिए उड़ान भरने और इंडोनेशियाई नेताओं को बचाने के लिए जकार्ता तक विमान उड़ाने के उनके किस्से आज भी मशहूर हैं।
राजनीतिक विवाद क्यों? यह विवाद नेहरू-गांधी परिवार और विपक्षी दलों के बीच चल रही वैचारिक लड़ाई का हिस्सा माना जा रहा है। एक तरफ भाजपा इसे कांग्रेस का काला अध्याय बता रही है, तो दूसरी तरफ ओडिशा की क्षेत्रीय राजनीति में बीजू पटनायक का नाम एक भावनात्मक मुद्दा है, जिसे लेकर बीजेडी कोई भी समझौता करने को तैयार नहीं है।
*कांग्रेस का काला अध्याय
— Dr Nishikant Dubey (@nishikant_dubey) March 27, 2026
11. अमेरिका की दलाल नेहरु-गांधी परिवार,आज ही के दिन यानि 27 मार्च 1963 को उड़ीसा के तत्कालीन मुख्यमंत्री बीजू पटनायक जी अमेरिका पहुँचे थे ।1962 का चीन के साथ युद्ध हमने अमेरिका के कहने पर और अमेरिका के पैसे से लड़ा था ।दलाई लामा के भाई अमेरिका के साथ… pic.twitter.com/Xmh9lnCcAv
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