मिडिल ईस्ट में अमेरिका की बड़ी सैन्य घेराबंदी: क्या ईरान में उतरेंगे अमेरिकी सैनिक?
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क्षेत्र में बढ़ती अमेरिकी हलचल मध्य-पूर्व में जारी तनाव के बीच अमेरिका ने अपनी सैन्य ताकत में भारी इजाफा किया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने पुष्टि की है कि क्षेत्र में हजारों की संख्या में नए मरीन और नाविकों को तैनात किया गया है। यह तैनाती ईरान के साथ चल रहे तनाव के बीच एक बड़ा रणनीतिक कदम माना जा रहा है।

USS ट्रिपोली की धमक शुक्रवार को अमेरिकी एम्फीबियस असॉल्ट शिप USS ट्रिपोली मध्य-पूर्व के जलक्षेत्र में पहुंच गया। इस जहाज पर 3,500 मरीन और नाविक सवार हैं। इसके साथ ही, क्षेत्र में पहले से तैनात 50,000 अमेरिकी सैनिकों की संख्या बढ़कर और अधिक हो गई है। यह तैनाती इस क्षेत्र में अमेरिका की बढ़ती आक्रामकता को दर्शाती है।

युद्धक साजो-सामान का जखीरा सेंटकॉम द्वारा जारी तस्वीरों में युद्ध की तैयारी स्पष्ट दिखाई दे रही है। USS ट्रिपोली अपने साथ अत्याधुनिक परिवहन और हमलावर विमान लेकर आया है। इनमें सीहॉक हेलीकॉप्टर, ऑस्प्रे (Osprey) परिवहन विमान और घातक F-35 लड़ाकू विमान शामिल हैं। मरीन पूरी तरह से युद्धक पोशाक में तैनात हैं, जो किसी भी आपात स्थिति के लिए उनकी तत्परता का संकेत है।

क्या जमीनी हमले की है तैयारी? इस तैनाती के बाद से दुनिया भर में यह अटकलें तेज हो गई हैं कि क्या वॉशिंगटन ईरान में जमीनी युद्ध की योजना बना रहा है। हालांकि, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने इन दावों को संतुलित करने की कोशिश की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिका बिना बड़े पैमाने पर जमीनी सेना उतारे भी अपने लक्षित परिणाम हासिल कर सकता है।

राष्ट्रपति को मिल सकते हैं कई विकल्प मार्को रूबियो के मुताबिक, यह तैनाती राष्ट्रपति को अधिक सैन्य विकल्प देने के लिए की गई है। रूबियो ने कहा, हमारी उम्मीद है कि ईरान के खिलाफ ऑपरेशन हफ्तों में खत्म हो जाएंगे, महीनों में नहीं। रूबियो ने यह भी जोड़ा कि सैनिकों की यह आवाजाही इसलिए की गई है ताकि किसी भी अचानक पैदा हुए संकट (आपात स्थिति) से निपटने के लिए राष्ट्रपति के पास तुरंत प्रतिक्रिया देने की क्षमता हो।

निष्कर्ष: दबाव बनाने की रणनीति मौजूदा घटनाक्रम इशारा करता है कि अमेरिका सीधे तौर पर ईरान के खिलाफ एक बड़े जमीनी युद्ध में कूदने के बजाय, उसे मनोवैज्ञानिक और सामरिक दबाव में रखना चाहता है। यह तैनाती ईरान को कड़ा संकेत देने के साथ-साथ अमेरिका को किसी भी अनहोनी के लिए पूरी तरह तैयार रखने का प्रयास है।

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