उत्तराखंड की राजनीति में भूचाल: तीन पूर्व विधायकों समेत 6 दिग्गज नेताओं ने थामा कांग्रेस का हाथ
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उत्तराखंड में 2027 के विधानसभा चुनाव की बिसात अभी से बिछने लगी है। चुनाव में भले ही समय हो, लेकिन दल-बदल की राजनीति ने राज्य के सियासी समीकरणों को हिलाकर रख दिया है। इसी कड़ी में कांग्रेस ने दिल्ली में एक बड़ा शक्ति प्रदर्शन करते हुए तीन पूर्व विधायकों समेत छह प्रमुख नेताओं को अपनी पार्टी में शामिल कर लिया है।

दिल्ली में हुआ दिग्गजों का मिलन दिल्ली में आयोजित एक विशेष सदस्यता कार्यक्रम में उत्तराखंड कांग्रेस की पूरी सीनियर लीडरशिप मौजूद रही। प्रदेश प्रभारी कुमारी शैलजा की मौजूदगी में इन नेताओं ने हाथ का साथ थामा। इस दौरान प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल, प्रीतम सिंह, हरक सिंह रावत, करन माहरा और नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य जैसे वरिष्ठ नेता उपस्थित थे।

राजकुमार ठुकराल की घर वापसी इस फेरबदल में सबसे बड़ा नाम भाजपा के पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल का है। रुद्रपुर सीट से दो बार (2012 और 2017) विधायक रहे ठुकराल का टिकट कटने के बाद भाजपा से मोहभंग हो गया था। 2022 में निर्दलीय लड़ते हुए उन्होंने 27 हजार वोट हासिल कर अपना जनाधार साबित किया था। अब उनका कांग्रेस में आना भाजपा के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है।

नारायण पाल और गौरव गोयल की एंट्री कांग्रेस ने उधम सिंह नगर की राजनीति पर अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए सितारगंज के दो बार के पूर्व विधायक नारायण पाल को भी पार्टी में शामिल किया है। वहीं, रुड़की के पूर्व मेयर गौरव गोयल का आना भी कांग्रेस के लिए बड़ी जीत है। गौरव गोयल ने भाजपा से बागी होकर निर्दलीय चुनाव लड़ा था और बड़े दलों को शिकस्त दी थी।

किन-किन नेताओं ने बदली निष्ठा? कांग्रेस में शामिल होने वाले अन्य प्रमुख नेताओं में टिहरी की घनसाली सीट से दो बार विधायक रहे भीमलाल आर्य, भीमताल से निर्दलीय प्रत्याशी रहे ब्लॉक प्रमुख लाखन सिंह नेगी और मसूरी नगर पालिका के पूर्व अध्यक्ष अनुज गुप्ता शामिल हैं। ये सभी अपने-अपने क्षेत्रों में मजबूत पकड़ रखते हैं, जिससे स्थानीय स्तर पर कांग्रेस को काफी मजबूती मिलने की उम्मीद है।

चुनावी गणित पर क्या होगा असर? जानकारों का मानना है कि कांग्रेस की यह रणनीति आगामी चुनावों में बीजेपी को उसी के गढ़ में घेरने की है। चुनाव से बहुत पहले इन नेताओं को अपने खेमे में लाकर कांग्रेस ने न केवल संगठन को विस्तार दिया है, बल्कि कार्यकर्ताओं में भी नया जोश भरने की कोशिश की है। राज्य के भविष्य के चुनावी नतीजे इन बड़े चेहरों की वफादारी और कार्यकर्ताओं के तालमेल पर निर्भर करेंगे।

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