बिहार के कैबिनेट मंत्री अशोक चौधरी हाल ही में तब चर्चा में आ गए जब उन्होंने पटना के एएन कॉलेज में राजनीति विज्ञान के सहायक प्राध्यापक के रूप में अपनी पहली क्लास ली। मंत्री जी ने बड़ी तैयारी के साथ छात्रों को संघवाद (Federalism) का पाठ पढ़ाया, लेकिन उनका यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही विवादों में घिर गया।
राजनीति विज्ञान के जानकारों और शिक्षाविदों का कहना है कि मंत्री जी ने क्लास में जो पढ़ाया, उसमें तथ्यों और अवधारणाओं की भारी चूक थी। आइए जानते हैं आखिर गलतियां कहां हुईं और सही संवैधानिक स्थिति क्या है।
1. क्या संघवाद सिर्फ एक एग्रीमेंट है? मंत्री जी ने क्लास में कहा कि Federalism is like an agreement. यह कहना संवैधानिक रूप से गलत है। संघवाद कोई साधारण समझौता नहीं, बल्कि शक्तियों का संवैधानिक विभाजन है। भारत फेडरेशन नहीं, बल्कि यूनियन ऑफ स्टेट्स है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 1(1) में स्पष्ट है कि भारत राज्यों का संघ है, न कि राज्यों द्वारा किया गया कोई समझौता।
2. भारत फेडरल स्टेट क्यों नहीं है? अक्सर लोग अमेरिका और भारत के संघवाद को एक समझ लेते हैं, जबकि दोनों में जमीन-आसमान का अंतर है। अमेरिका में राज्य समझौते से बने हैं, वहां राज्यों को अलग होने का अधिकार (सैद्धांतिक रूप से) और ज्यादा स्वायत्तता है। भारत में देश ने राज्यों का गठन किया है, न कि राज्यों ने मिलकर देश बनाया। इसलिए हमारे यहां केंद्र को अधिक मजबूत रखा गया है ताकि देश की अखंडता बनी रहे।
3. क्या राज्यों को स्वतंत्र (Independent) कहना सही है? मंत्री जी ने राज्यों को इंडिपेंडेंट बताया, जो कि एक गलत शब्दावली है। संघीय व्यवस्था में राज्य स्वायत्त (Autonomous) होते हैं, स्वतंत्र नहीं। राज्य अपनी संवैधानिक सीमाओं के भीतर काम करते हैं, लेकिन अंतिम संप्रभुता राष्ट्र के पास होती है। उन्हें देश से अलग होने का कोई अधिकार नहीं है।
4. 7वीं अनुसूची का मतलब स्वतंत्र सरकारें नहीं सातवीं अनुसूची का उद्देश्य राज्य और केंद्र के बीच शक्तियों का बंटवारा करके समन्वित शासन चलाना है, न कि उन्हें अलग-अलग स्वतंत्र सरकारें बनाना। यह शक्तियों का पृथक्करण नहीं, बल्कि सहयोग की व्यवस्था है। राजनीति विज्ञान में इन शब्दों का चयन बेहद महत्वपूर्ण होता है क्योंकि ये सरकार की प्रकृति को परिभाषित करते हैं।
5. नियंत्रण या सहयोग? मंत्री जी ने संघवाद को नियंत्रण (Control) का माध्यम बताया। यह भी गलत है। संघवाद का असली उद्देश्य सत्ता का विकेंद्रीकरण और विविधताओं को समायोजित करना है। इसे कंट्रोल के चश्मे से देखना लोकतंत्र की मूल भावना के खिलाफ है। यह व्यवस्था पावर शेयरिंग और कोऑपरेटिव फेडरलिज्म पर आधारित है।
निष्कर्ष: अधूरा ज्ञान खतरनाक हो सकता है डॉ. बीआर आंबेडकर ने संविधान सभा में स्पष्ट किया था कि भारत का संघ अविभाज्य है। जब किसी शैक्षणिक संस्थान में संवैधानिक विषयों को पढ़ाया जाता है, तो वहां सटीकता अनिवार्य होती है। मंत्री जी का प्रयास सराहनीय हो सकता है, लेकिन बिना तैयारी और गहरे ज्ञान के छात्रों को गलत अवधारणाएं पढ़ाना उनके भविष्य के लिए घातक साबित हो सकता है। अब देखना यह है कि इस विवाद के बाद कॉलेज प्रशासन या मंत्री जी का इस पर क्या रुख होता है।
*बिहार के कैबिनेट मंत्री अशोक चौधरी राजधानी पटना के एएन कॉलेज के राजनीति विज्ञान विभाग में सहायक प्राध्यपक नियुक्त हुए हैं. बुधवार को उन्होंने अपनी पहली क्लास ली. आप भी देखिए उन्होंने छात्रों को क्या पढ़ाया?#Bihar | #AshokChaudhary pic.twitter.com/X4gz2X3c64
— NDTV India (@ndtvindia) March 27, 2026
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