6 किलोमीटर तक गूंजी धमाके की गूंज: स्वर्णरेखा नदी में मिला 227 किलो का जिंदा बम सेना ने किया डिफ्यूज
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पूर्वी सिंहभूम के बहरागोड़ा स्थित पानीपड़ा (नागुडसाई) गांव में पिछले आठ दिनों से दहशत का सबब बने 227 किलो वजनी जिंदा बम को सेना के बम निरोधक दस्ते ने बुधवार को सफलतापूर्वक निष्क्रिय कर दिया। दोपहर 12:30 से 1:15 बजे तक चले इस चुनौतीपूर्ण ऑपरेशन के बाद पूरे इलाके ने राहत की सांस ली।

अंदाजे से कहीं ज्यादा घातक था बम गांव में दो बम मिले थे। ग्रामीण दूसरे बम को निष्क्रिय समझकर बेफिक्र थे, लेकिन सेना की जांच में वह भी पूरी तरह जिंदा निकला। विशेषज्ञों के अनुसार, उस बम का फ्यूज ग्रामीणों ने अनजाने में निकाल लिया था। यदि समय रहते इसे नहीं पहचाना जाता, तो एक भीषण त्रासदी हो सकती थी।

सुरक्षा का अभेद्य घेरा सेना के विशेषज्ञों ने इस ऑपरेशन के लिए एक सुरक्षित दायरा तय किया था। प्रक्रिया के दौरान धूल का गुबार आसमान छू गया और धमाके की आवाज 5 से 6 किलोमीटर दूर तक सुनाई दी। प्रशासन ने एहतियात के तौर पर झारखंड के पानीपड़ा और पश्चिम बंगाल के सातमा व जालमाटि गांवों के निवासियों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट कर दिया था। भारी पुलिस बल ने इलाके को छावनी में तब्दील कर रखा था।

ग्रामीणों ने लगाए भारतीय सेना जिंदाबाद के नारे सफलतापूर्वक बम निष्क्रिय होते ही वहां मौजूद ग्रामीणों का डर विजयघोष में बदल गया। लोगों ने भारतीय सेना जिंदाबाद और प्रशासन जिंदाबाद के नारे लगाए। कई युवाओं ने इस साहसिक पल को अपने कैमरों में कैद किया।

अब भी रेड जोन घोषित खतरा टलने के बावजूद प्रशासन ने एहतियात के तौर पर घटनास्थल को अभी भी रेड जोन घोषित रखा है। घाटशिला के एसडीएम अजीत कुमार कुजूर और सीओ राजाराम सिंह मुंडा ने स्पष्ट किया है कि जब तक बम के अवशेषों को पूरी तरह साफ नहीं कर लिया जाता, तब तक आम लोगों का वहां जाना प्रतिबंधित रहेगा।

कई थानों की रही संयुक्त कार्रवाई इस जटिल ऑपरेशन को अंजाम देने में बहरागोड़ा, बरसोल, श्याम सुंदरपुर और चाकुलिया थाना प्रभारियों की टीम ने सक्रिय भूमिका निभाई। इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया कि सुरक्षा बलों की सतर्कता ही ग्रामीणों की सुरक्षा की असली ढाल है।

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