संसद में ड्रेस कोड का विवाद: क्या टी-शर्ट और कार्गो पहनना लोकतंत्र की गरिमा के खिलाफ है?
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संसद का बजट सत्र इस समय चर्चा में है, लेकिन हंगामे का कारण केवल राजनीतिक मुद्दे नहीं, बल्कि सांसदों का पहनावा भी बन गया है। बीजेपी नेता जयवीर शेरगिल ने संसद में सांसदों के लिए सख्त ड्रेस कोड लागू करने की मांग उठाकर एक नई बहस छेड़ दी है।

लोकतंत्र का मंदिर या क्लब लाउंज ?

बीजेपी नेता जयवीर शेरगिल का तर्क है कि भारत की संसद लोकतंत्र का मंदिर है, न कि कोई क्लब लाउंज । उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि जिस तरह अदालतों में वकीलों और ऑपरेशन थिएटर में डॉक्टरों के लिए विशिष्ट ड्रेस कोड अनिवार्य है, वैसा ही संसद के लिए भी होना चाहिए। उनके अनुसार, टी-शर्ट और कार्गो पैंट जैसे कैजुअल कपड़ों पर संसद के भीतर पाबंदी लगनी चाहिए।

क्या राहुल गांधी निशाने पर हैं?

हालांकि शेरगिल ने अपने पहले ट्वीट में राहुल गांधी का नाम नहीं लिया था, लेकिन विपक्ष ने इसे सीधे तौर पर राहुल गांधी के पहनावे से जोड़ दिया है। राहुल गांधी अक्सर संसद में टी-शर्ट और कार्गो पैंट पहने नजर आते हैं।

इस पर पलटवार करते हुए शेरगिल ने कहा, मैंने किसी का नाम नहीं लिया था, लेकिन कांग्रेस की प्रतिक्रिया ने चोर की दाढ़ी में तिनका वाली कहावत सच कर दी। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि यदि संसद की गरिमा का ख्याल नहीं रखा गया, तो भविष्य में लोग बिना शर्ट या हाफ-शॉर्ट्स पहनकर भी आ सकते हैं।

कांग्रेस ने बताया संकीर्ण मानसिकता

बीजेपी की इस मांग पर विपक्ष भड़क गया है। कांग्रेस सांसद अशोक सिंह ने इस मांग को बेहद संकीर्ण मानसिकता करार दिया है। वहीं, पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वारिंग ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह सब अनावश्यक है।

उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा, कल को बीजेपी यह भी तय करने लगेगी कि सांसदों को कौन से रंग के कपड़े पहनने चाहिए। कांग्रेस नेताओं का मानना है कि संसद में कपड़ों के बजाय जनहित के मुद्दों पर चर्चा होनी चाहिए।

क्या ड्रेस कोड अनिवार्य होना चाहिए?

संसद की मर्यादा और सांसदों की अभिव्यक्ति की आजादी के बीच यह बहस अब तेज हो गई है। एक ओर बीजेपी इसे सदन की गरिमा बनाए रखने के लिए जरूरी बता रही है, वहीं विपक्ष इसे व्यक्तिगत आजादी पर हमला और ध्यान भटकाने की रणनीति मान रहा है। अब देखना यह है कि क्या यह मामला केवल बयानबाजी तक सीमित रहता है या कोई आधिकारिक नियम बदलने की दिशा में आगे बढ़ता है।

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