अमेरिका को ईरान की दो टूक: अपनी हार को समझौता मत कहो, अब दुनिया बदल चुकी है
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ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे तनाव के बीच वाशिंगटन के दावों की हवा निकलती दिख रही है। अमेरिका जहां एक ओर समझौते की बात कर रहा है, वहीं ईरान इन दावों को सिरे से खारिज कर रहा है। तेहरान ने अमेरिका को स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी है कि वह अपनी रणनीतिक हार को किसी सहमति या डील का नाम देकर खुद को न बचाए।

रणनीतिक हार को डील का नाम मत दो

खातम अल-अंबिया के केंद्रीय मुख्यालय के प्रवक्ता इब्राहिम जुल्फिकार ने अमेरिका पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा, जिस रणनीतिक शक्ति का अमेरिका बखान करता था, वह अब पूरी तरह से रणनीतिक हार में तब्दील हो चुकी है। यदि अमेरिका वास्तव में वैश्विक महाशक्ति होता, तो वह अब तक इस दुविधा से बाहर निकल चुका होता।

वादों का दौर खत्म, दुनिया दो खेमों में

जुल्फिकार ने अमेरिका के आश्वासनों को खोखला बताया। उन्होंने कहा कि अमेरिका के वादों का दौर अब खत्म हो चुका है। आज दुनिया सच और झूठ के दो खेमों में बंट चुकी है। उन्होंने अमेरिका के अंदरूनी तनाव पर तंज कसते हुए कहा कि ऐसा लगता है कि अमेरिका अब खुद से ही समझौते करने की स्थिति में आ गया है, क्योंकि दुनिया का अब उनके दावों पर भरोसा नहीं रहा।

ऊर्जा और तेल की कीमतें अब पहले जैसी नहीं रहेंगी

ईरान ने तेल और ऊर्जा बाजार को लेकर भी सख्त रुख अपना लिया है। जुल्फिकार ने साफ किया कि क्षेत्र में स्थिरता अब अमेरिका के भरोसे नहीं, बल्कि ईरान के सशस्त्र बलों के हाथों में है। उन्होंने दो टूक कहा, जब तक अमेरिका को यह समझ नहीं आता कि इस क्षेत्र में स्थिरता की गारंटी कौन है, तब तक उसे तेल और ऊर्जा की पुरानी कीमतें देखने को नहीं मिलेंगी।

जब तक इरादा नहीं बदलेगा, स्थिति नहीं सुधरेगी

ईरान ने चेतावनी दी है कि अब कोई भी स्थिति पहले जैसी नहीं रहेगी। जब तक अमेरिका के गंदे दिमागों से ईरान के खिलाफ किसी भी सैन्य कार्रवाई का विचार पूरी तरह से मिट नहीं जाता, तब तक यह इच्छाशक्ति कायम रहेगी। ईरान ने किसी भी पुरानी स्थिति में वापसी से साफ इनकार कर दिया है।

क्या फेल हो गई है शांति वार्ता?

मौजूदा हालात बताते हैं कि अमेरिका की ओर से भेजे गए कथित 15 सूत्रीय शांति प्रस्ताव और पाकिस्तान की मध्यस्थता की पेशकश ईरान के लिए कोई मायने नहीं रखती। भले ही डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में ईरान के परमाणु और ऊर्जा संयंत्रों पर अगले कुछ दिनों तक हमले न करने का दावा किया हो, लेकिन जमीनी स्तर पर ईरान का सख्त तेवर यह संकेत दे रहा है कि युद्ध का तनाव अभी पूरी तरह से खत्म नहीं हुआ है।

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