महाराष्ट्र में निवेश करने वाले आम लोगों के लिए बड़ी राहत की खबर है। मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस ने विधानसभा में ऐलान किया है कि महाराष्ट्र प्रोटेक्शन ऑफ इंटरेस्ट ऑफ डिपॉजिटर्स (MPID) एक्ट में बड़े बदलाव किए जा रहे हैं। इसका मुख्य उद्देश्य घोटालेबाज कंपनियों पर नकेल कसना और निवेशकों का पैसा जल्द से जल्द वापस दिलाना है।
6 महीने में अंतिम होगी कुर्की की कार्रवाई अब तक के कानूनी पेचिदगियों के कारण निवेशकों को अपने पैसे के लिए सालों-साल अदालतों के चक्कर काटने पड़ते थे। नए संशोधन के बाद, नामित अदालत (Designated Court) के लिए आवेदन के 180 दिनों (छह महीने) के भीतर संपत्ति की कुर्की को अंतिम (Absolute) घोषित करना अनिवार्य होगा। इससे कागजों पर होने वाली खानापूर्ति खत्म होगी।
तारीख पर तारीख का खेल अब होगा बंद अदालत में बार-बार सुनवाई टालने की प्रवृत्ति पर लगाम लगाने के लिए नियमों को बेहद सख्त बनाया गया है। अब बचाव पक्ष के वकीलों को सुनवाई टालने के लिए केवल दो मौके दिए जाएंगे। अनावश्यक देरी करने पर भारी जुर्माना भी लगाया जाएगा। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि न्याय के लिए निवेशकों को अनिश्चित काल तक प्रतीक्षा नहीं कराई जा सकती।
आपराधिक मुकदमा जारी रहने के बीच ही होगी नीलामी संशोधन का सबसे अहम पहलू यह है कि अदालत द्वारा कुर्की को अंतिम घोषित करते ही सरकार तुरंत नीलामी की प्रक्रिया शुरू कर देगी। इससे पहले, आपराधिक मुकदमा चलने के कारण नीलामी रुकी रहती थी। अब कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी, लेकिन निवेशकों को पैसा लौटाने के लिए संपत्ति का तत्काल निपटान किया जाएगा।
श्रीरामपुर घोटाले पर विशेष नजर गृह राज्य मंत्री योगेश कदम ने बताया कि श्रीरामपुर में हुए करोड़ों के घोटालों से प्रभावित हजारों छोटे निवेशकों को इसका सीधा लाभ मिलेगा। अब तक प्रशासन कुर्की तो कर लेता था, लेकिन नीलामी न होने से पैसा फंसा रहता था। संशोधित कानून इस भौतिक बाधा को पूरी तरह खत्म कर देगा।
बेनामी संपत्तियों पर भी गिरेगी गाज सरकार अब घोटालेबाजों द्वारा परिवार के सदस्यों या करीबियों के नाम पर बनाई गई बेनामी संपत्तियों की भी जांच कर रही है। एक विशेष टीम श्रीरामपुर भेजी जाएगी जो कुर्क की गई जमीनों का वर्तमान बाजार मूल्य (वर्ष 2026 के अनुसार) तय करेगी। इससे यह सुनिश्चित होगा कि निवेशकों को उनकी मूल जमा राशि का अधिकतम हिस्सा वापस मिल सके।
Necessary amendments will be made to the MPID Act to ensure that cases are resolved within 6 months and investors receive their money back.
— Devendra Fadnavis (@Dev_Fadnavis) March 24, 2026
MPID कायद्यात आवश्यक बदल करून, 6 महिन्यांच्या आत निकाल लागेल आणि गुंतवणूकदारांचे पैसे परत मिळतील, यासाठी सुधारणा करण्यात येतील.… pic.twitter.com/U4TQCxRG7y
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